खरीफ फसलों की बुवाई का आदर्श समय निकलता जा रहा है। जून के अंतिम सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो किसानों को फसलों की संकर किस्म की बुवाई करनी पड़ेगी।
सीकर. राजस्थान में 'खेती अगेती चोखी' कहावत पर इस बार मानसून की देरी भारी पड़ रही है। बुवाई से पूर्व की जुताई के बाद खेत तपकर तैयार हैं और किसानों को बुवाई के लिए मानसून की बरसात का इंतजार है। मानसून में हो रही देरी के कारण लाखों किसानों की करोड़ों रुपए की खरीफ फसल का उत्पादन प्रभावित होगा। किसानों की मानें तो जून माह का दूसरा पखवाड़ा चल रहा है और बादल छा तो रहे लेकिन बरसात नहीं हो रही है।
ऐसे में खरीफ फसलों की बुवाई का आदर्श समय निकलता जा रहा है। जून के अंतिम सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो किसानों को फसलों की संकर किस्म की बुवाई करनी पड़ेगी। जिले में खरीफ सीजन के लिए बुवाई करीब चार लाख हैक्टेयर में होती है।
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इधर प्यासी है फसल
शेखावाटी में सिंचित क्षेत्र में कुछ किसानोंं ने देसी बाजरे व खरीफ की अन्य फसलों की बुवाई कर ली थी, लेकिन पिछले कई दिन से तापमान में बढ़ोतरी के कारण भूमि की नमी कम हो रही है और किसानों के लिए फसलों की एक साथ सिंचाई कर पाना भी मुश्किल है। ऐसे में शीघ्र ही मानसून की इकसार बरसात नहीं हुई तो उत्पादन भी प्रभावित होगा।
सब्जियां हो रही महंगी
मानसून में देरी के कारण इस समय आने वाली हरी सब्जियों का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। वहीं सब्जियों का उत्पादन भी प्रभावित होने से मांग के अनुसार पूर्ति नहीं हो पा रही है वहीं भाव में बढ़ गए हैं। ऐसे में रसोई सर्वाधिक प्रभावित हुई है। गर्मी के कारण सब्जियों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
कम संग्रहित हो रहा है दूध
गर्मी के कारण हरा चारा नहीं मिलने से पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में कमी आई है। वहीं डेयरियों में मांग के अनुसार पशुपालक दुग्ध उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। पलसाना डेयरी में डेयरी में इस समय 65 से 70 हजार लीटर दूध संग्रहित हो रहा है। कमोबेश यहीं हाल अन्य डेयरियों का भी है।
इनका कहना है...
खरीफ की परम्परागत फसलों की बुवाई के लिए समय निकलता जा रहा है। दस दिन में बरसात हो गई तो परम्परागत देसी फसलें बोई जा सकेगी। मानसून में देरी के कारण खरीफ का रकबा और उत्पादन भी प्रभावित होगा। वहीं पशुओं के लिए चारे की समस्या भी हो जाएगी।
- हरदेव सिंह बाजिया, कृषि अधिकारी
बरसात नहीं होने से पशुओं के दुग्ध उत्पादन में 20 प्रतिशत की कमी आ गई है। बरसात नहीं हुई तो दुध का उत्पादन और गिरेगा।
- डा. सुरेन्द्र सिंह , पशुपालन विभाग, सीकर
कम बरसात होने से खरीफ की अगेती फसलों की बुवाई तो कर दी लेकिन लम्बा अंतराल सूखा निकलने के बाद भी बरसात के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। बोई गई फसलों की नमी सूखने लगी है। जून के दूसरे पखवाडे में बरसात नहीं हुई तो किसानों को खासा नुकसान होगा।
- शिशुपाल सिंह, किसान