
खाटूश्यामजी. संभवत: दुनिया का पहला ऐसा मंदिर, जहां देवता के केवल शीश की पूजा होती है। जी हां! यह है खाटूश्यामजी का प्रख्यात लखदातार का मंदिर! भव्य मंदिर...सैकड़ों धर्मशालाएं...करोड़ों भक्त...लेकिन इनके लिए जो जरूरी सुविधाएं हैं, वे भक्तों की बढ़ती संख्या के सामने अब कम पडऩे लगी है। सीकर जिले में स्थित खाटूश्यामजी की महिमा देश ही नहीं विदेश तक फैली है। हर साल फाल्गुन मेले में यहां लाखों की संख्या में भक्त बाबा के दरबार में शीश नवाने आते हैं। मंदिर तो भव्य है, लेकिन आसपास अतिक्रमण के कारण अब छोटा पडऩे लगा है। इसके अलावा हर माह ग्यारस को बाबा का मिनी मेला भी भरता है।
बाबा श्याम के दरबार में भारत वर्ष से लाखों श्रद्धालु नववर्ष 2020 का स्वागत करने पहुंचेंगे। मंदिर प्रबंधन इसकी तैयारी में जुटा है। वहीं शीतकालीन अवकाश एवं वर्ष के अंतिम दौर में रोजाना हजारों श्रद्धालु परिवार सहित श्याम दर्शन को आ रहे हंै। इधर, नववर्ष को लेकर श्री श्याम मंदिर कमेटी ने मंदिर को आकर्षक विद्युत झालरों से सजाया है और श्याम बाबा के सुगम दर्शन हो इसके लिए जिगजैक, बेरिकेडिंग, टेंट आदि व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली है। नववर्ष को लेकर खाटूधाम की अधिकतर होटलें, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं बुक हो चुकी है।
बहेगी भजनों की रसधार
नए साल के आगमन पर खाटूधाम की हर धर्मशाला में श्याम भक्त भजन संध्याओं का आयोजन करेंगे। जिसमें बाबा श्याम की मनमोहक झांकी सजाकर उसके आगे जोत जलाएंगे। भजन संध्या में देशभर से आए गायक भजनों की प्रस्तुतियां देंगे।
आंकड़ों की नजर में खाटूधाम
80 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं सालाना
310 से अधिक धर्मशालाएं
30 से ज्यादा होटल्स, गेस्ट हाउस
05 लाख के करीब भक्त आएंगे नए साल पर
300 साल पुराना है मंदिर