कभी भाजपा का गढ़ माने जाने वाली रॉबर्टसगंज विधानसभा पर वर्ष 2002 के चुनाव में कमल मुरझाने के बाद सपा की साइकिल दौड़ी तो 2007 के चुनाव में हाथी की चिंघाड़ सुनाई दी, लेकिन 2012 में एक बार फिर पहली बार सक्रिय राजनीति में भाग्य आजमा रहे युवा अविनाश कुशवाहा ने साइकिल पर बैठ चुनावी जीत का आगाज किया और बसपा के रमेश सिंह पटेल को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे।
आगामी चुनाव में रॉबर्ट्सगंज सीट से बसपा ने जहां अपने ओबरा के वर्तमान विधायक सुनील सिंह यादव पर दांव लगाया है, तो कांग्रेस और भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। पिछले चुनाव में बसपा के खिलाफ चली लहर के चलते पहली बार जीत का स्वाद चखने वाले अविनाश के सामने कद्दावर कैलाशनाथ यादव की चुनाव जिताऊ रणनीति और अखिलेश यादव के स्वप्निल वाराणसी शक्तिनगर मार्ग के निर्माण में बने ओवरब्रिज से नाराज रॉबर्ट्सगंज के लोगों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ेगा ।
यादव अल्पसंख्यक और अन्य पिछड़ी जाति के वोटों के आधार पर मौजूदा विधायक अविनाश हर पार्टी के प्रत्याशी पर पैनी नजर बनाये हैं । वोट के हिसाब से सबसे ज्यादा पारंपरिक वोट का दावा करने वाली बसपा के पुराने खिलाड़ी कैलाशनाथ यादव ने शायद इसीलिये अपने बिधायक पुत्र के लिये रॉबर्ट्सगंज सीट को ज्यादा मुफीद समझा है। वहीं ब्राम्हण और वैश्य के गठजोड़ बाहुल्य वाले रॉबर्ट्सगंज पर भाजपा अपना पुराना कब्ज़ा जमाने के लिए हर कदम फूंक फूंक कर रख रही है ।
राबर्ट्सगंज विधानसभा सीट पर मतदाताओं की संख्या
जातिगत आधार पर मतदाताओं की संख्या