Bihar News: पटना साइंस कॉलेज के प्राचार्य और भू-गर्भ विज्ञान के प्राध्यापक रहे प्रो बसंत कुमार मिश्र बताते हैं कि गंगा (Ganga River) का पानी साफ होने पर (Dolphins In India) डॉल्फिन (Dolphins In Ganga) (Dolphin Bhawan) की सक्रियता बेहद बढ़ जाती है (Dolphin Bhawan To Made In Ganga)...
प्रियरंजन भारती
बेगूसराय/भागलपु: भागलपुर के सुल्तानगंज -अगुवानी घाट पुल से सटे गंगा नदी के बीचों-बीच चार मंजिला डॉल्फिन भवन (ऑब्जर्वेटरी भवन) इसी साल तैयार हो जाएगा।देश के इस एकमात्र डॉल्फिन सेंचुरी में लोग डॉल्फिन की अठखेलियां निहार सकेंगे।
गंगा समेत नदियों में 1363 डॉल्फिन
ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस सेंचुरी में 170 के करीब डॉल्फिन देखी गई हैं। 2018 में राज्य सरकार कि ओर से चार जगहों पर किए गए सर्वेक्षण में राज्य की नदियों में करीब 1363 डॉल्फिन देखी गईं। हालांकि देश भर में तीन हजार के करीब डॉल्फिन पाई जाती हैं। जुलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के संयुक्त निदेशक डॉ गोपाल शर्मा के अनुसार 2018 में बिहार सरकार ने इस बाबत सर्वे कराया था। इसमें गंगा नदी में बक्सर से मोकामा तक 333, मोकामा से मनिहारी तक 750, वीरपुर ब्याज से पटना गांधी सेतु तक 155 और घाघरा नदी में 125 के करीब डॉल्फिन देखी गई थी। इसके प्रजनन का समय मार्च अप्रैल होता है। इसलिए इसकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
गंगा किनारे भी दिखती डॉल्फिन
पटना साइंस कॉलेज के प्राचार्य और भू-गर्भ विज्ञान के प्राध्यापक रहे प्रो बसंत कुमार मिश्र बताते हैं कि गंगा का पानी साफ होने पर डॉल्फिन की सक्रियता बेहद बढ़ जाती है। गंगा जितनी प्रदूषणमुक्त होगी उतना ही गांगेय का संरक्षण पोषण बेहतर हो सकेगा।विभाग के एक अन्य प्रोफेसर रवींद्र कुमार बताते हैं कि अब गंगा किनारे भी डॉल्फिन को देखा जाने लगा है। गंगा की स्वच्छता कायम रहने पर और जलीय जीव किनारे आने लग जाएंगे।
पूरी तरह पारदर्शी होगा भवन
चालीस फीट ऊंचे बन रहे डॉल्फिन भवन की अनेक खासियत होगी। यह पूरी तरह पारदर्शी और पुल के नीचे तथा ऊपर बीस बीस फीट तक होगा। इसमें खड़े होकर लोग डॉल्फिन की अठखेलियां निहार सकेंगे। इसमें कैफिटेरिया के साथ पुल पर दोनों ओर 75-75 गाड़ियों की पार्किंग का जोन भी बनाया जा रहा है। इस जगह पुल की चौड़ाई सौ फीट होगी।
इससे इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा
डॉल्फिन मैं के नाम से चर्चित प्रो आर के सिन्हा के अनुसार इसके बन जाने से इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इससे डॉल्फिन के संरक्षण को भी प्रचार प्रसार मिलेगा। इस गांगेय जीव पर बड़े अध्ययन के लिए मशहूर प्रो.सिन्हा ने बताया कि ऐसे डॉल्फिन भवन गंगा में और भी स्थलों पर बनाए जाने वाले हैं।