राजस्थान डिजिफेस्ट में 'आईटी के माध्यम से शहरी शासन की पुनर्कल्पना' सत्र
जयपुर। जेईसीसी, सीतापुरा में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट में तीसरे दिन मंगलवार को नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने 'आईटी के माध्यम से शहरी शासन की पुनर्कल्पना' विषय पर संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शहरी प्रशासन की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
मंत्री खर्रा ने कहा कि यूनिक प्रॉपर्टी आईडी की पहल से नागरिकों को बार-बार केवाईसी कराने की बाध्यता से मुक्ति मिली है। आधार आधारित ई-केवाईसी और ई-नगर प्रणाली के माध्यम से सेवाएं अब पूरी तरह डिजिटल हो चुकी हैं, जिससे पहले मैन्युअल प्रक्रियाओं में होने वाली मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि अब पट्टों से संबंधित कार्यों के लिए लोगों को जयपुर विकास प्राधिकरण के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है।
निवेश के परिदृश्य पर खर्रा ने कहा कि राजस्थान अब केवल एमओयू साइनिंग राज्य नहीं, बल्कि एमओयू एक्जीक्यूशन राज्य बन चुका है। यही कारण है कि निवेशकों में राज्य के प्रति विशेष विश्वास और रुचि है। प्रदेश में 400 से अधिक एमओयू धरातल पर उतर चुके हैं, जिनसे 37,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है।
यूडीएच मंत्री ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को राज्य की सभी विकास प्राधिकरणों के लिए रोल मॉडल बताया और कहा कि जेडीए ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से सुशासन का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अवसर पर यूडीएच के प्रमुख सचिव देबाशीष पृष्टी, जेडीए सचिव निशांत जैन, यूआइटी भीलवाड़ा के आयुक्त ललित गोयल, जोधपुर विकास प्राधिकरण उप आयुक्त रामजी भाई कलबी ने भी अपनी बात रखी।