श्री गंगानगर

जैविक खेती से कमा रहे मुनाफा,बने प्रेरणास्रोत

-प्रगतिशील किसान: जिला स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित हैं राजेन्द्र गोदारा
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  • कृष्ण चौहान श्रीगंगानगर.सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद अधिकांश लोग आराम और सुकून का जीवन चुनते हैं, लेकिन सूरतगढ़ तहसील के अमरपुरा गांव के राजेंद्र गोदारा ने इस धारणा को तोड़ते हुए जैविक खेती का एक नया रास्ता चुना। हरियाणा के लेखा विभाग में मुख्य लेखाधिकारी के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने सेवानिवृत्ति के उपरांत अपनी 31 बीघा भूमि को जहर-मुक्त खेती करने का संकल्प लिया। आज वे जिले में जैविक खेती के प्रेरणास्रोत किसान के रूप में पहचान बना चुके हैं। जैविक खेती के प्रति उनके समर्पण के लिए कृषि विभाग ने उन्हें जिला स्तरीय जैविक खेती पुरस्कार से सम्मानित किया है।

ड्रैगन फ्रूट खेती की तैयारी

  • कोरोना काल में प्रकृति से जुड़े किसान राजेन्द्र जैविक खेती कर रहे हैं। वे आम, किन्नू और अमरूद की जैविक बागवानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह निकट भविष्य में 10 बीघा भूमि में ड्रैगन फ्रूट, नाशपाति और बब्बूकस की जैविक बागवानी शुरू करेंगे। इसकी तैयारी कर रहे हैं। पौधों की बुकिंग कर दी है। एक-दो माह में रोपण करेंगे। राजेन्द्र का कहना है कि जैविक खेती करने में शुरुआत में उत्पादन भले कम हो, लेकिन इसकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य अधिक होता है। इससे बेहतर आय मिलती है। उनका मानना है कि जब हमारे इरादे साफ हों, तो खेत ही नहीं, जीवन भी हरा-भरा और सार्थक बन जाता है क्योंकि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ समाज की नींव है।

इनका कहना है:

  • राजेंद्र गोदारा की पहल जैविक खेती को नई दिशा दे रही है। वे केवल किसान नहीं, बल्कि पर्यावरण के सच्चे प्रहरी हैं। उनका प्रयास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
  • डॉ.सतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक (कृषि) विस्तार, श्रीगंगानगर
Updated on:
13 Nov 2025 12:43 pm
Published on:
13 Nov 2025 12:43 pm