गंगनहर को तय शेयर 2500 क्यूसेक से 400 क्यूसेक पानी कम दिया जा रहा है। विभाग ने मनमर्जी से शेयर में कटौती कर दी है, वहीं पंजाब में ही 200 से 300 क्यूसेक पानी की चोरी भी हो रही है।
श्रीगंगानगर। पड़ोसी प्रदेश चाहे पंजाब हो या हरियाणा, पानी के मामले में दोनों की मंशा साफ नहीं है। दोनों प्रदेश हर साल राजस्थान के हिस्से के पानी पर मनमर्जी से कैंची चला देते हैं। पंजाब में धान की रोपाई शुरू हो चुकी हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री के आदेश पर पंजाब जल संसाधन विभाग ने वहां की नहरों ईस्टर्न कैनाल और सरहिंद फीडर को उनकी जल ग्रहण क्षमता से अधिक पानी उपलब्ध करवा दिया है, जबकि गंगनहर को तय शेयर 2500 क्यूसेक से 400 क्यूसेक पानी कम दिया जा रहा है। विभाग ने मनमर्जी से शेयर में कटौती कर दी है, वहीं पंजाब में ही 200 से 300 क्यूसेक पानी की चोरी भी हो रही है। यही हाल इंदिरा गांधी नहर का है। इंदिरा गांधी नहर का शेयर 7750 क्यूसेक है। धान की रोपाई शुरू होने के हफ्ते भर बाद इसके तय शेयर में भी 1500 क्यूसेक की कटौती कर दी गई है।
हमारे हिस्से के पानी से पंजाब में धान की रोपाई: गंगनहर और इंदिरा गांधी नहर के लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की ओर से निर्धारित पानी के शेयर का उपयोग पंजाब अपने यहां धान की रोपाई में कर रहा है। हैडवर्क्स पर नियंत्रण पंजाब के हाथों में होने के कारण जल संसाधन विभाग के अधिकारी कुछ भी करने में असमर्थ हैं। पानी पर पंजाब की दबंगई के चलते शेयर के अनुसार पानी नहीं मिलने से गंगनहर क्षेत्र में कॉटन, ग्वार और मूंग की फसल दम तोड़ रही हैं तथा बागवानी को भी नुकसान हो रहा है।
मियाद निकली हुआ कुछ नहीं
झुंझुनूं: झुंझुनूं जिले को 1994 के यमुना जल समझौते के तहत पानी मिलना था। बाद में 17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते को लागू करने के लिए नए सिरे से डीपीआर बनाए जाने का एमओयू किया गया, लेकिन नई डीपीआर तैयार करने की मियाद भी निकल चुकी है। अभी तक कुछ नहीं हुआ। इसी तरह जिले में मंडावा व झुंझुनूं विधानसभा क्षेत्र के महज 70 गांवों में ही कुंभाराम लिफ्ट कैनाल का पानी पहुंचा है। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों के भी दर्जनों गांव पानी से वंचित हैं जबकि नवलगढ़, चिड़ावा, पिलानी, सूरजगढ़, उदयपुरवाटी विधानसभा क्षेत्र के लोगों को बिलकुल भी पानी नहीं मिला है।
भरतपुर: हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश व हिमाचल प्रदेश के बीच 12 मई 1994 को जल समझौता हुआ था। इसके अनुसार यमुना के 1281 क्यूसेक पानी में से भरतपुर को 500 क्यूसेक पानी देना तय किया गया था, लेकिन गुड़गांव नहर की चेन 36 जो राजस्थान में प्रवेश करती है, उससे भरतपुर को 100 क्यूसेक पानी भी नहीं मिल रहा है। कुम्हेर तक गुड़गांवा नहर परियोजना का दूसरा चरण कागजों में अटका हुआ है। 15 वर्षों में औखला बैराज से जिले को 41.86 प्रतिशत ही पानी मिला। गुड़गावां कैनाल का करीब 70 किमी क्षेत्र हरियाणा में आता है। गुड़गावां कैनाल की क्षमता 500 क्यूसेक तथा भरतपुर फीडर की 300 क्यूसेक है। जब भी जिले को पानी दिया जाता है तो हमारे हिस्से के पानी की चोरी हरियाणा में हो जाती है।