सन 1971 की यादों को ताजा करते हुए महिलाओं ने अपने स्तर पर अतिरिक्त चूल्हों व भट्टियों की व्यवस्था का काम शुरू कर दिया...
- सोहन वर्मा
श्रीगंगानगर। पुलवामा में बीते दिनों हुए आतंकी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को लेकर पूरा देश पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश में है। अपने शहीदों का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर बम बरसाकर तबाह कर दिया। जवाबी कार्रवाई में वायु सेना के विमानों से करीब 1000 किलो विस्फोटक से जैश के आतंकी ठिकानों पर हमला किया जिसमें करीब 300 आतंकियों की मौत की खबर से पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया। जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध जैसा माहौल हो गया। ऐसे में हमेशा देश को पाकिस्तान से सुरक्षित रखने वाली राजस्थान की सीमा पर हर ग्रामीण पाकिस्तानी दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देने को तैयार हो गया और भारतीय सेना के सहयोग के लिए हर संभव मद्द में जुट गया।
भारत-पाक सीमा से सटा गांव खाटां। इसी गांव के वाशिंदों ने 1971 के युद्ध में सुरक्षा बलों का कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग किया था। सीमा पर उपजे तनाव के बाद एक बार फिर इस गांव के लिए उस समय की यादें ताजा हो गई हैं। सन 1971 की यादों को ताजा करते हुए महिलाओं ने अपने स्तर पर अतिरिक्त चूल्हों व भट्टियों की व्यवस्था का काम शुरू कर दिया। यहां तक कि ग्रामीणों ने खाद्य सामग्री का भंडारण भी शुरू किया है। यह सब ग्रामीण अपने स्तर पर ही कर रहे हैं।
गांव खाटां के युवा वीरेंद्र भादू कहते हैं, हम किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेंगे। गांव में तैयारियां पूरी कर ली हैं। भारत पाक सीमा से मात्र ढाई किलोमीटर दूर बसे गांव 27 ए के बस स्टैंड पर भारत पाक विभाजन से अब तक सभी युद्ध देख चुके नर सिंह बोले- यहां के किसान भी जवानों के साथ हथियार उठाने को तैयार है।
सीमा चौकी से महज 800 मीटर की दूरी पर स्थित एक ढाणी के 88 वर्षीय दर्शन ने बताया कि वह 1965 तथा 1971 की लड़ाई देख चुके है। हर हालात में अपने देश के जवानों के साथ रहना चााहते हैं। पाकिस्तान को सबक सिखाना जरूरी है।