Porta Cabin School: सुकमा जिले के चिंतलनार स्थित पोर्टा केबिन आवासीय विद्यालय में अव्यवस्थाओं के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अधिकारियों को निलंबित कर दिया।
Officer Suspended: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में स्थित चिंतलनार (चिंतागुफा) के पोर्टा केबिन आवासीय विद्यालय में सामने आई गंभीर अव्यवस्थाओं पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर अमित कुमार द्वारा 31 मार्च को किए गए अचानक निरीक्षण में विद्यालय की हालत बेहद चिंताजनक पाई गई, जिसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।
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निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब मिली। जगह-जगह कचरा बिखरा हुआ था और छात्रावास की व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त नजर आई। बच्चों के बिस्तर ठीक से नहीं लगे थे और कई छात्र-छात्राएं अस्वच्छ माहौल में रह रहे थे, जिससे प्रबंधन की लापरवाही स्पष्ट रूप से उजागर हुई।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सबसे पहले अधीक्षक किरण कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उन्हें एक दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से अधीक्षक (माध्यमिक स्तर) भूपतराज ठाकुर और सहायक अधीक्षक (प्रारंभिक स्तर) को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, कोन्टा कार्यालय निर्धारित किया गया है।
जिला प्रशासन का कहना है कि बच्चों की शिक्षा और रहने की व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में ऐसे संस्थानों की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि छात्रों को बेहतर वातावरण और सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।
बता दें कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों, खासकर सुकमा जिले में संचालित पोर्टा केबिन आवासीय विद्यालयों की स्थापना बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इन स्कूलों में दूर-दराज के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को रहकर पढ़ाई करने की सुविधा दी जाती है।
हालांकि, समय-समय पर इन आवासीय विद्यालयों में अव्यवस्था, संसाधनों की कमी और प्रबंधन में लापरवाही की शिकायतें सामने आती रही हैं। निरीक्षण के दौरान कई बार साफ-सफाई, भोजन व्यवस्था, छात्रावास प्रबंधन और मूलभूत सुविधाओं को लेकर खामियां उजागर होती रही हैं, जिसके बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है।