
प्रतापपुर. वन अधिकारियों की कृपा ऐसी कि अभी भी पूरा काम रिटायर रेंजर ही कर रहे हैं। नए रेंजर की पदस्थापना तो हो गई लेकिन वे सिर्फ रिटायर रेंजर के इशारे पर दस्तखत करने का काम कर रहे हैं। यह मामला वन मंडल सूरजपुर अंतर्गत वन परिक्षेत्र प्रतापपुर का है जहां पूर्व में पदस्थ रेंजर डीएन जायसवाल एक महीने पूर्व 31 अक्टूबर को ही रिटायर हो चुके हैं, लेकिन रेंज का पूरा काम वरिष्ठ अधिकारियों की शह पर वे ही कर रहे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि रेंज कार्यालय परिसर में स्थित सरकारी आवास में आरा लगा लकड़ी की चिराई कराकर पटरे और चौखट बनवाये जा रहे हैं जिनकी तस्करी के आरोप लगने लगे हैं।
गौरतलब है कि करीब एक वर्ष पूर्व डीएन जायसवाल की पदस्थापना रेंजर के रूप में वन परिक्षेत्र प्रतापपुर में हुई थी। तब से वे विभाग के बड़े अधिकारियों के चहेते बने हुए थे और इसी का फायदा अब उन्हें उनके रिटायरमेंट के बाद भी मिल रहा है और वे रिटायर होने के बाद भी रेंजर की तरह ही काम कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार डीएन जायसवाल पिछले महीने 31 अक्टूबर को रिटायर हो चुके हैं जिसके बाद उन्हें नए रेंजर को पदभार देकर स्वतंत्र हो जाना था किंतु अधिकारियों की कृपादृष्टि के कारण ऐसा नहीं हुआ और वे अभी भी स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं। डीएन जायसवाल अभी भी यहां रेंजर बने हुए हैं और रेंज के समस्त कार्य वे कर रहे हैं।
उनके रिटायर होने कर बाद बिहारपुर में पदस्थ रेंजर रामशरण सिंह को प्रतापपुर का प्रभार दे दिया गया लेकिन वे सिर्फ कागजों में यहां के प्रभारी रेंजर हैं, पूरा काम जायसवाल कर रहे हैं और प्रभारी रेंजर सिर्फ उनके इशारों पर कागजों में दस्तखत करने का काम करते हैं।सरकारी आवास का प्रयोग हो या सरकारी वाहन की बात, सभी का प्रयोग रिटायर डीएन जायसवाल ही करते हैं।
प्रभारी रेंजर तो यहां दिखते भी नहीं, जब कागजों में दस्तखत करना होता है तभी रामशरण सिंह प्रतापपुर आते हैं। इतना ही नहीं उनसे दस्तखत कराने कर्मचारियों को बिहारपुर तक जाना पड़ता है। वन विभाग के अधिकारियों ने प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में नियम कायदों को ताक में रख दिया है और अपना हित साधने के लिए रिटायर हो चुके रेंजर डीएन जायसवाल से रेंज का समस्त काम करा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि रिटायर हो चुके रेंजर से काम कराना विभाग के अधिकारियों की मजबूरी बन गई है क्योंकि ऐसे बहुत से काम अधूरे पड़े हैं जिनका निर्माण डीएन जायसवाल द्वारा कराया जा रहा था और उनकी बहुत सा रकम इसमें फंसी है, जिसमें हिस्सेदारी अधिकारियों की भी है।
कार्यालय परिसर में बनवाए जा रहे चौखट-पटरे
प्रतापपुर वन परिक्षेत्र कार्यालय परिसर में बने एक सरकारी आवास में आरा लगाकर लकड़ी की चिराई कराई जा रही है। पिछले कई दिनों से हो रहे चिराई कार्य में बड़े पैमाने पर चौखट और पटरे बनवाए जा रहे हैं।
विभाग अपने बचाव में सरकारी कार्यों के लिए चौखट और पटरे अनुमति लेकर बनवाने की बात कह रहा है लेकिन इसके विपरीत यहां बन रहे चौखट और पटरे की संख्या इतनी ज्यादा है कि रेंजर के साथ विभाग के अन्य लोगों पर परिसर में अवैध तरीके से चिराई करा तस्करी के आरोप लगने लगे हैं और वृहद जांच की मांग की जाने लगी है।
रेंजर प्रतापपुर के और काम घुई रेंज में
पूर्व रेंजर डीएन जायसवाल अधिकारियों के कितने चहेते थे, इस बात का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे रेंजर तो प्रतापपुर में थे लेकिन अधिकारियों ने उन्हें निर्माण कराने का जिम्मा घुई रेंज में भी दे दिया था जबकि वहां रेंजर के रूप में पांडे की पदस्थापना हो चुकी थी। जायसवाल द्वारा घुई में कई सरकारी भवनों के साथ तालाब बांधों का निर्माण कराया जा रहा था जो अभी भी कराया जा रहा है।
वर्तमान प्रभारी रेंजर ने भी माना
रिटायर हो चुके रेंजर डीएन जायसवाल अभी भी प्रतापपुर में काम करा रहे हैं इस बात पर जब वर्तमान प्रभारी रेंजर रामशरण सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने स्वीकार करते हुए कहा कि डीएन जायसवाल द्वारा अभी भी काम कराये जा रहे हैं, क्योंकि उनके समय के बहुत से काम लंबित हैं और उनका पैसा फंसा हुआ है।
लकड़ी की चिराई के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लेकर सरकारी आवासों के लिये चौखट और पटरे बनवाये जा रहे हैं। सरकारी आवास और वाहन के प्रयोग पर उन्होंने कहा कि वे विभाग के अधिकारी रहे हैं तो इनका प्रयोग करना कुछ भी गलत नहीं है।