
नटवाड़ा (टोंक): ग्रामीण इलाकों में इन दिनों खरीफ फसलों की कटाई और थ्रेसिंग का काम जोर-शोर से चल रहा है। मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए किसान महीनों की मेहनत से तैयार फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में जुटे हैं। सुबह होते ही खेतों में किसानों और मजदूरों की चहल-पहल शुरू हो जाती है। कहीं ज्वार, बाजरा, मूंग और उड़द की कटाई हो रही है, तो कहीं थ्रेसर मशीनों से अनाज निकाला जा रहा है। एक साथ फसल पकने से मजदूरों की मांग बढ़ गई है, जिसका असर मजदूरी की दरों पर भी दिखाई दे रहा है। किसान शंकर मोठिया ने बताया कि मौसम खराब होने से पहले फसल को सुरक्षित घर पहुंचाना किसानों की प्राथमिकता है। एक साथ बड़ी मात्रा में फसल पकने से स्थानीय स्तर पर श्रमिकों की कमी हो गई है। ऐसे में किसानों को बाहर से आने वाले मजदूरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
वर्तमान में फसल कटाई के लिए एक मजदूर को करीब 400 से 500 रुपए प्रतिदिन दिए जा रहे हैं, जबकि थ्रेसिंग के काम में मजदूरी 600 से 700 रुपए प्रतिदिन तक पहुंच गई है। एक साथ बड़ी मात्रा में फसल पकने और कटाई का काम तेज होने से मजदूरी सामान्य दिनों की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़ गई है।
श्रमिक बस्तियों और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं ऑटो में सवार होकर खेतों तक पहुंच रही हैं। एक समूह से मजदूरी को लेकर बातचीत शुरू होते ही आसपास मौजूद दूसरे समूह भी काम मिलने की उम्मीद में नजदीक आ जाते हैं। मजदूरी तय होने के बाद ऑटो चालक भी सक्रिय हो जाते हैं। मजदूरों को खेत तक लाने और शाम को वापस छोड़ने का किराया भी किसानों को ही वहन करना पड़ रहा है।
कटाई का सीजन शुरू होते ही मजदूरी के भाव बढ़ गए हैं। किसान बाइक लेकर खेतों तक पहुंच रहे हैं और कटी फसल की ढेरियां थ्रेसर तक पहुंचाने के लिए मजदूरों के समूह तलाश रहे हैं। श्रमिकों की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसान काम शुरू होने से एक दिन पहले ही मजदूरी तय कर एडवांस देकर मजदूरों की बुकिंग कर रहे हैं।
फसल कटाई के सीजन में खेती के काम में बेहतर मजदूरी मिलने से भवन निर्माण से जुड़े श्रमिक भी खेतों का रुख कर रहे हैं। शहीद पन्नालाल चौराहे पर रोजाना निर्माण कार्य के लिए मजदूर नजर आते हैं, लेकिन इन दिनों खेती में अधिक दिहाड़ी मिलने से कई श्रमिक गांवों में कटाई के काम को प्राथमिकता दे रहे हैं।