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झुंझुनूं धीर सिंह हत्याकांड में बड़ा अपडेट, उम्रकैद की सजा काट रहा खुली जेल से फरार कातिल 10 साल बाद अरेस्ट

झुंझुनूं में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा देवी सिंह 10 साल 4 महीने बाद गिरफ्तार हुआ। साल 2016 में खुली जेल से फरार होकर वह बेंगलुरु की पेपर मिल में मजदूरी कर रहा था। गांव महनसर आने की सूचना पर पुलिस ने उसे बिसाऊ बस स्टैंड से पकड़ा।
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jhunjhunu murder case

खुली जेल से फरार कातिल 10 साल बाद अरेस्ट (फोटो-एआई)

झुंझुनूं: हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काटते हुए खुली जेल से फरार हुआ देवी सिंह करीब 10 साल 4 महीने बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा। झुंझुनूं की खुली जेल से 14 जून 2016 को फरार होने के बाद वह बेंगलुरु की एक पेपर मिल में मजदूरी कर रहा था। इस दौरान वह परिवार के संपर्क में भी बना रहा, लेकिन पुलिस को उसका सुराग नहीं मिला। गांव महनसर आने की सूचना मिलने पर झुंझुनूं कोतवाली और बिसाऊ थाना पुलिस ने तलाश शुरू की। पुलिस ने उसे बिसाऊ बस स्टैंड से पकड़ लिया।

लाठी से पीटकर की थी ग्रामीण की हत्या

मामला 23 दिसंबर 2007 की रात का है। महनसर निवासी देवी सिंह रात करीब 11:30 बजे जागरण से लौट रहा था। रास्ते में उसे अपने ही गांव और मोहल्ले का धीर सिंह शेखावत मिल गया। किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और मारपीट में बदल गई। धीर सिंह के पास लाठी थी।

इसी दौरान देवी सिंह ने उसी लाठी से धीर सिंह पर हमला कर दिया और उसे वहीं छोड़कर घर चला गया। दूसरी ओर, ग्रामीण घायल धीर सिंह को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई। अगले दिन देवी सिंह को भी धीर सिंह की मौत का पता चला। पुलिस ने घटना के दो-तीन दिन के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले में करीब तीन साल तक सुनवाई चली और 23 अप्रैल 2010 को अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अच्छे आचरण पर खुली जेल में किया था शिफ्ट

सजा सुनाए जाने के बाद देवी सिंह को बीकानेर जेल भेज दिया गया। जेल में आचरण ठीक रहने के कारण वर्ष 2016 में उसे झुंझुनूं की खुली जेल में शिफ्ट किया गया। हालांकि, वहां आने के कुछ समय बाद ही वह 14 जून 2016 को फरार हो गया। उसके फरार होने के बाद जेल प्रहरी बद्रीप्रसाद ने 17 जून 2016 को झुंझुनूं कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। फरारी के मामले में उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था।

बेंगलुरु में बदली पहचान, परिवार से संपर्क बरकरार

पुलिस के अनुसार, खुली जेल से फरार होने के बाद देवी सिंह बेंगलुरु चला गया और वहां एक पेपर मिल में मजदूरी करने लगा। करीब 10 साल 4 महीने तक वह वहीं रहा। इस दौरान वह परिवार से फोन पर संपर्क में बना रहा, लेकिन पुलिस की गिरफ्त से दूर रहा। चुनाव के मद्देनजर चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान 10 अक्टूबर को पुलिस को उसके गांव महनसर आने की सूचना मिली।

इसके बाद झुंझुनूं कोतवाली के एएसआई बलबीर चावला, कांस्टेबल विजेंद्र और कुलदीप ने बिसाऊ थाना पुलिस के साथ मिलकर उसकी तलाश शुरू की। रविवार को देवी सिंह के बिसाऊ बस स्टैंड पर मौजूद होने की सूचना मिली।

इस पर बिसाऊ थानाधिकारी उमाशंकर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पूछताछ में उसकी पहचान महनसर निवासी देवी सिंह पुत्र शीशपाल के रूप में हुई। पुलिस ने उसे डिटेन कर बाद में झुंझुनूं कोतवाली पुलिस को सौंप दिया।

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