उदयपुर में हुए तीन पंचायत समिति सदस्यों की सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल कर भाजपा को धरातल दिखा दिया है।
उदयपुर/चंदनसिंह देवड़ा. गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देकर जोश में आई कांग्रेस को उदयपुर संभाग में हुए पंचायतीराज और निकाय उपचुनाव में खुशी मनाने का मौका दिया है। उदयपुर में हुए तीन पंचायत समिति सदस्यों की सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल कर भाजपा को धरातल दिखा दिया है। यह तीनों सीटें भाजपा के कब्जे में थी। इस जीत से कांग्रेसी जश्न मना रहे हैं तो भाजपा मंथन करने में जुट गई है।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले हुए पंचायत समिति उपचुनाव के परिणामों ने कांग्रेस में जान फूंकने का काम किया है। अधिकांश जगह पर कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। उदयपुर के पंचायत समिति सदस्य के उपचुनाव में गिर्वा ब्लाॅक में कांग्रेस की राधा डांगी ने भाजपा की प्रेमलता डांगी को 58 वोट से हरा दिया जबकि झाड़ोल पंचायत समिति में कांग्रेस के कालूलाल ने भाजपा के प्रकाश को 24 वोट के मामूली अंतर से हरा दिया । इधर ऋषभदेव में कांग्रेस की बाबूंडी देवी ने भाजपा की कैलाशी देवी को 600 वोट के अंतर से पंचायत समिति सदस्य का चुनाव हरा दिया। तीनों सीट जीतकर कांग्रेस जश्न मना रही है जबकि भाजपा को आत्म मंथन की जरुरत है। यह नतीजे आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजाने वाले हैं। उदयपुर ग्रामीण की पूर्व कांग्रेस विधायक सज्जनदेवी कटारा ने कहा कि भाजपा ने गरीब जनता के भलाई के काम नहीं किए इसलिए जनता ने आईना दिखाना शुरू कर दिया है तो कांग्रेस के मौजूदा झाडोल विधायक हीरालाल दरांगी ने भी कहा कि भाजपा राज से जनता उब गई लिहाजा कांग्रेस पर भरोसा जताया इससे कार्यकर्ता जोश में हैं।
उदयपुर संभाग के बांसवाड़ा में जिलापरिषद की वार्ड 14 सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। वहीं प्रतापगढ़ मे दो सीटों पर भाजपा तो एक पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चित्तोड़गढ़ जिले के बेगूं नगर पालिका के वार्ड 9 उपचुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की। भीलवाड़ा में वार्ड 1 की सीट पर कांगे्रस ने कब्जा जमा लिया तो गंगापुर मे पार्षद उपचुनाव में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की। यह परिणाम भले ही छोटे स्तर के चुनाव के हैं लेकिन कांग्रेस को इन नतीजों ने संजीवनी देने का काम किया है लिहाजा कार्यकर्ता सक्रिय होंगे तो पार्टी को फायदा मिलेगा। वहीं परिणामों को देख भाजपा को बड़े नेताओं के भरोसे रहना भारी पड़ सकता है । ऐसे में अपना जनाधार कायम रखने के लिए जमीनी स्तर पर मेहनत करने की जरूरत दिख रही है।