
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. कोरोना से बचाव के लिए निजी बाजार से लेकर सरकारी हॉस्पिटल में जीवन रक्षक इंजेक्शन रेमडेसिविर और टोसिलिजुमेब का खूब इस्तेमाल किया गया। हालांकि दोनो की तुलना में टोसिलिजुवेब कम लगाए गए हैं। सरकारी हॉस्पिटल में ये नि:शुल्क लगाए गए, जबकि बाजार में भी मरीजों ने खुद के बचाव के लिए इनका सर्वाधिक उपयोग किया। कोरोना संक्रमित और गंभीर प्रभावित मरीजों के लिए बाजार से लेकर एमबी हॉस्पिटल में सितम्बर अक्टूबर में ये इंजेक्शन खूब लगे तो जैसे-जैसे कोरोना का संक्रमण कम नजर आने लगा तो इंजेक्शन की मांग से लेकर बिक्री भी कम हुई है।
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- निजी बाजार में अगस्त माह से इसकी खपत शुरू हुई थी, जो इंजेक्शन लोगों को निजी हॉस्पिटलों में लगाए गए, इसमें शुरुआती माह में तो करीब सात सौ से आठ सौ इंजेक्शन बिके, लेकिन सितम्बर और अक्टूबर में तो इनकी बिक्री को जैसे पंख लग गए। इसमें इन दो माह में प्रति माह करीब दो से ढाई हजार इंजेक्शन बेचे गए, जो निजी हॉस्पिटलों ने मरीजों के लिए खरीदे और लगाए।
- गत एक पखवाड़े से अब बाजार से इसकी मांग घटने लगी है, इसमें रेमडेसिविर की मांग केवल 30 प्रतिशत रही है टोसिलिजुमेव की बेहद कम यानी करीब 15 फीसद।
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रेमडेसिविर इंजेक्शन पांच कंपनियां बना रही थी, जबकि टोसिलिजुमेव इंजेक्शन केवल एक कंपनी बना रही थी
कीमत
- रेमडेसिविर- 2800 से 5 हजार रुपए तक अलग-अलग कंपनियों के अनुसार। यह पांच या छह इंजेक्शन मरीजों को अलग-अलग दिनों में लगाए जाते हैं।
- टोसिलिजुमेव- 30 हजार 800 रुपए कीमत है। जबकि इसे बाजार में 32 हजार तक भी बेचा गया। यह एक या दो इंजेक्शन एक मरीज को लगाए जाते हैं।
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एमबी में ऐसे लगे ये इंजेक्शन - सरकारी स्तर पर भर्ती मरीजों को चिकित्सक की सलाह पर ये इंजेक्शन नि:शुल्क लगाए गए हैं।
माह- भर्ती मरीज- लगाए गए रेमडेसिविर- लगाए गए टोसिलिजुमेव
सितम्बर- 772- 483-9
अक्टूबर- 391- 298- 15
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सितम्बर और अक्टूबर में रेमडेसिविर और टोसिलिजुमेव जीवन रक्षक इंजेक्शनों की बड़ी संख्या में बिक्री हुई है। पिछले करीब दस दिनों से इनकी बिक्री कम हो गई है, जैसे-जैसे मरीज कम हो रहे हैं, ये इंजेक्शन भी कम बिकने लगे हैं। ये इंजेक्शन वाकई जीवन रक्षक साबित हुए हैं।
अरविन्द गुप्ता, राजस्थान व ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट व अध्यक्ष उदयपुर संभाग
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जिन-जिन मरीजों को जरूरत थी, उसके आधार पर उनकी स्थिति देखते हुए ये जीवन रक्षक इंजेक्शन लगाए गए। इन नि:शुल्क इंजेक्शन का मरीजों को बेहद लाभ मिला और उनकी जान बची। सरकार के इस कदम का सुपरिणाम लोगों को मिला।
डॉ आरएल सुमन, अधीक्षक एमबी हॉस्पिटल उदयपुर
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