उदयपुर के कोड़ियात गांव स्थित एक रिसॉर्ट पर सरकारी जमीन उपयोग के आरोप में जल संसाधन विभाग ने कार्रवाई करते हुए रास्ते के दोनों छोर पर ताले लगा दिए। विभाग के अनुसार, लीज समाप्त होने के बावजूद ईआरसीपी भूमि पर सड़क बनाकर वाहनों की आवाजाही की जा रही थी तथा एसटीपी और रिटर्निंग वॉल निर्माण कार्य भी चल रहा था।
उदयपुर. शहर के समीपवर्ती कोड़ियात गांव के एक रिसॉर्ट में जल संसाधन विभाग ने बड़ी कार्रवाई कर अपने हिस्से की सरकारी जमीन को कब्जे में लेकर सीज कर दिया। टीम ने विभागीय भूमि के दोनों छोर पर ताले लगाकर रास्ता बंद कर दिया। विभाग का कहना है कि लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद होटल प्रबंधन सरकारी जमीन का उपयोग कर रहा था तथा वहां वाहनों की आवाजाही के लिए रास्ता बना लिया। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि विभाग के खाते में दर्ज भूमि पर पेवर ब्लॉक बिछाकर करीब 15 से 20 मीटर चौड़ा रास्ता बना दिया, जिसका उपयोग होटल में आने-जाने वाले वाहनों के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा क्षेत्र में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और रिटर्निंग वॉल निर्माण का कार्य भी चल रहा था।
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2025 में खत्म हो चुकी थी लीज, फिर भी जारी रहा उपयोग
जानकारी के अनुसार, कोडिय़ात (बूझड़ा पंचायत) के खसरा नम्बर 131 व 134 की करीब .34 हेक्टेयर भूमि मूल रूप से एक एसटी खातेदार की थी, जिसे देवास परियोजना के लिए अवाप्त किया गया। वर्ष 2019-20 में यह भूमि को पांच वर्ष के लिए ईशान क्लब एंड होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दी। यह अवधि वर्ष 2025 में समाप्त हो चुकी है। आरोप है कि लीज समाप्त होने के बाद भी ईशान क्लब एंड होटल्स प्राइवेट लिमिटेड प्रबंधन इस भूमि का उपयोग लगातार करता रहा। यहां वर्तमान में ताज अरावली रिसॉर्ट एंड स्पा संचालित है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि अब ईआरसीपी (ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट) के खाते में दर्ज है और भविष्य में यहां देवास परियोजना का कार्यालय प्रस्तावित है। बावजूद इसके होटल की ओर से इस जमीन पर रास्ता विकसित कर उपयोग किया जा रहा था।
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मौके पर चल रहा था निर्माण, ग्रामीणों ने रुकवाया काम
ग्रामीणों के अनुसार, मौके पर एसटीपी निर्माण कार्य शुरू किया गया। जैसे ही ग्रामीणों को जानकारी मिली, उन्होंने विरोध जताया और काम रुकवाया। इसके बाद जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया। मौके पर एसटीपी टैंक और रिटर्निंग वॉल का निर्माण कार्य चल रहा था। उनका कहना है कि एसटीपी टैंक का एक हिस्सा तथा करीब 10 से 15 फीट रिटर्निंग वॉल सरकारी जमीन पर बनाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग के बोर्ड के ठीक पीछे ही जेसीबी से खुदाई चल रही थी। सरकारी जमीन पर टाइल्स बिछाकर सड़क बनाई और दो बड़े गेट भी लगा दिए।
नहर के नाम पर ली जमीन, होटल को दे दी
जल संसाधन विभाग ने मौके पर किसानों की जमीन नहर निर्माण के लिए अवाप्त की थी, उस जमीन को बाद में होटल को लीज पर दे दी। उनका कहना है कि देवास नहर क्षेत्र के ऊपर पहाड़ काटकर निर्माण कार्य किया और कई जगह वन भूमि तथा यूडीए की जमीन का भी उपयोग किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से लगातार शिकायतें की जा रही हैं, पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण को लेकर हाईकोर्ट का स्टे होने के बावजूद कार्य जारी है।---
यह है पूरा विवाद
आवंटन से ही नियमों का खुले उल्लंघन का आरोप- खसरा नम्बर 158 सिंचाई विभाग की भूमि थी, जिसे नियमों के विपरीत आवंटित कर दिया गया।
- खसरा नम्बर 162/1 को वन विभाग की ओर से डीम्ड फॉरेस्ट माना गया था, जहां पहले जल संरक्षण और पौधरोपण कार्य किए गए।- खसरा नम्बर 163 को लेकर राजस्व स्तर पर विवाद लंबित होने के बावजूद आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
- पहाड़ी भूमि पर निर्माण को लेकर हाईकोर्ट के आदेश और राजस्थान हिल उपनियम-2018 के प्रावधानों की अनदेखी की गई।- हिल पॉलिसी का मामला आने पर यह कहा कि जमीन पर निर्माण पर रोक है, आवंटन पर नहीं है, इस आधार पर जमीन को आवंटित की। जबकि खुद आवंटी ने स्वयं इस जमीन पर लिखकर दिया कि यहां 100 कमरों का निर्माण होना है, फिर भी अनदेखी की गई।
खसरा नम्बर 131 व 134 की करीब .34 हेक्टेयर भूमि ईआरसीपी के खाते में दर्ज है। यह भूमि पूर्व में होटल को लीज पर दी थी, जिसकी अवधि 2025 में समाप्त हो चुकी है। मौके पर निरीक्षण में पाया कि विभागीय जमीन पर पेवर ब्लॉक लगाकर रास्ता बनाया और वाहनों की आवाजाही हो रही थी। ग्रामीणों की शिकायत पर टीम मौके पर पहुंची और विभाग की भूमि को कब्जे में लेकर दोनों ओर ताला लगा दिया। एसटीपी निर्माण होटल की सीमा में मिला, पर विभागीय जमीन का उपयोग किया जा रहा था।
राजेश कुमार, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग
मौके पर एसटीपी टैंक और रिटर्निंग वॉल का निर्माण चल रहा था। सरकारी जमीन पर सड़क बनाई गई, गेट लगाए गए और रात में लगातार पहाड़ काटने का काम हो रहा है। एसटीपी टैंक का हिस्सा और रिटर्निंग वॉल सरकारी जमीन पर है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अजय व्यास, पंचायत समिति सदस्य, गिर्वा