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उदयपुर. केंद्र और राज्य सरकार की वाहन स्क्रैप पॉलिसी का मकसद सड़क पर पुराने, अनफिट और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर पर्यावरण को बेहतर करना है। पर शहर में जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। फिलहाल एक भी सरकारी पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा नहीं है, जिससे स्क्रैप व्यवस्था अधूरी साबित हो रही है। इसका सीधा असर वाहन मालिकों पर पड़ रहा है, जिन्हें पुरानी गाड़ियां कम कीमत पर भंगार व्यापारियों को बेचनी पड़ रही हैं।
सरकार ने 15 वर्ष से ज्यादा पुराने निजी वाहनों तथा फिटनेस फेल व्यावसायिक वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए स्क्रैप नीति लागू की। इसके तहत ऐसे वाहनों को अधिकृत स्क्रैप सेंटर में भेजकर पूरी तरह नष्ट किया जाना है, पर शहर में अधिकृत स्क्रैप सुविधा नहीं होने से पूरा सिस्टम व्यावहारिक रूप से प्रभावित हो रहा है। वाहन मालिकों को न तो निर्धारित स्क्रैप मूल्य मिल रहा है और न टैक्स छूट अथवा रजिस्ट्रेशन में मिलने वाले लाभ का फायदा।---
भंगार बाजार बना एकमात्र विकल्पशहर में फिलहाल प्राइवेट भंगार और स्क्रैप व्यापारी ही पुरानी गाड़ियों का प्रमुख विकल्प हैं। वाहन मालिक कार या बाइक इन्हीं व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हैं, जहां उन्हें सरकारी स्क्रैप प्रक्रिया की तुलना में काफी कम कीमत मिल रही है। कई मामलों में गाड़ियों के पार्ट्स अलग कर बेच दिए जाते हैं, पर मालिकों को कोई आधिकारिक प्रमाणपत्र या सरकारी लाभ प्राप्त नहीं होता।
स्क्रैप पॉलिसी का सबसे बड़ा उद्देश्य था वाहन मालिकों को पुरानी गाड़ियों के बदले उचित लाभ मिले और पर्यावरण को भी फायदा हो। लेकिन शहर में स्क्रैप सेंटर न होने के कारण यह लाभ जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। न तो वाहन मालिकों को सही स्क्रैप वैल्यू मिल रही है और न ही नए वाहन खरीदने पर मिलने वाली टैक्स छूट का फायदा पूरी तरह मिल पा रहा है।----
आर्थिक नुकसान झेल रहे लोगकई वाहन मालिकों का कहना है उनकी गाड़ियां अभी भी चलने योग्य हैं, पर नियमों के चलते उन्हें या तो कम कीमत में बेचने या फिर बाहर शहर भेजकर स्क्रैप कराने की मजबूरी बन रही है। इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
स्क्रैप पॉलिसी के तहत मिलने वाले सर्टिफिकेट को लेकर अब अनियमितता की बात सामने आ रही है। कई मामलों में वाहन मालिक पुरानी गाड़ी स्क्रैप करवाने के बाद मिलने वाला स्क्रैप सर्टिफिकेट दूसरे लोगों को बेच देते हैं। वहीं कुछ लोग इस सर्टिफिकेट को खरीदकर उपयोग टैक्स छूट या नए वाहन पर लाभ लेने में कर रहे हैं।---
स्क्रैप पॉलिसी क्या है?स्क्रैप पॉलिसी एक सरकारी नियम है जिसके तहत 15 साल से पुरानी या फिटनेस फेल हो चुकी गाड़ियों को सड़क से हटाया जाता है। ऐसी गाड़ियों को चलाने की अनुमति नहीं दी जाती और उन्हें अधिकृत स्क्रैप सेंटर में खत्म किया जाता है। इसके बदले वाहन मालिक को स्क्रैप सर्टिफिकेट मिलता है, जिससे नई गाड़ी खरीदने पर टैक्स में छूट जैसी सुविधा मिल सकती है।
आरटीओ कार्यालय में महीने में 3 से 4 लोग इस संबंध में जानकारी लेने पहुंचते हैं, और वे भी अधिकतर वेबसाइट देखकर आते हैं। अधिकांश वाहन मालिकों को स्क्रैप नियमों, प्रक्रिया और लाभों की सही जानकारी नहीं है, जिससे वे इस नीति के फायदे से वंचित रह रहे हैं। स्क्रैप सेंटर नहीं होने से कई वाहन मालिक आरसी निरस्त करवाकर अपनी पुरानी गाड़ियां भंगार में बेचने को मजबूर हैं। ऐसा ही वाक्या शुक्रवार हुआ जब पत्रिका टीम के सामने ही एक व्यक्ति अपनी 2000 मॉडल की बाइक स्क्रैप करवाने के लिए आरटीओ आया। पर स्क्रैप सेंटर नहीं होने से उसे गाड़ी कबाड़ में बेचनी पड़ी।--
स्क्रैप पॉलिसी का उद्देश्य पुराने और अनफिट वाहनों को सड़क से हटाकर प्रदूषण कम करना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सरकार से जल्द स्वीकृत स्क्रैप सेंटर खोलने की तैयारी में है, ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल सके।
- मुकेश डाड़, कार्यवाहक जिला परिवहन अधिकारी
Updated on:
12 May 2026 10:29 am
Published on:
11 May 2026 06:05 pm
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