उदयपुर

उदयपुर : दूषितहाल फतहसागर: पेटे से किनारे तक अपशिष्ट, प्लास्टिक और खरपतवार की ताल…पानी में गए करोडों

फतहसागर झील के संजय गार्डन से मस्तान बाबा रोड तक प्लास्टिक, मिट्टी के ढेर और सड़ती खरपतवार के कारण हालात बदहाल हैं, जबकि करोड़ों खर्च के बावजूद सफाई अधूरी पड़ी है।

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Jun 19, 2026
fatehsagar taalab
झील में जलीय खरपतवार व गंदगी 

उदयपुर. कभी फतहसागर झील में गिरने वाले नालों की जानकारी देने वालों को इनाम देने की मुहिम चलाकर प्रशासन ने झील संरक्षण का संदेश दिया था। उस समय दावा किया था कि झील में गंदगी पहुंचाने वाले हर स्रोत पर नजर रखी जाएगी। लेकिन आज हालात यह हैं कि लाखों खर्च करने के बावजूद फतहसागर के कई हिस्से खुद प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं। मानसून की दस्तक से पहले झील के दक्षिणी हिस्से, विशेषकर संजय गार्डन से लेकर मस्तान बाबा रोड तक गंदगी, प्लास्टिक, मिट्टी के ढेर और जलीय खरपतवार से अटे पड़े हैं।

एक ओर पानी, दूसरी तरफ कचरा

फतहसागर के संजय गार्डन वाले हिस्से का दृश्य ज्यादा खराब है। झील के एक ओर साफ पानी दिखाई देता है, जबकि दूसरी ओर झील के किनारे प्लास्टिक थैलियां, घरेलू कचरा और गंदगी फैली है। झीलप्रेमियों का कहना है कि मानसून पूर्व यह कचरा नहीं हटाया गया तो पहली तेज बारिश में पूरा प्लास्टिक और अपशिष्ट सीधे झील में पहुंच जाएगा। इससे न केवल जल गुणवत्ता प्रभावित होगी बल्कि झील में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ेगा।

जेसीबी उतारी, रेलिंग तोड़ी, मिट्टी छोड़ी

छह माह पहले फतहसागर से जलीय खरपतवार निकालने के लिए झील में जेसीबी उतारी गई थी। इसके लिए झील की रेलिंग तक तोड़ी गई और अस्थायी रास्ता बनाया गया। लेकिन कार्य पूरा होने के बाद जो मिट्टी निकाली गई, वह आज भी झील पेटे में छोटे-छोटे पहाड़ों के रूप में पड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की पहली बारिश के साथ यह मिट्टी बहकर झील में पहुंचेगी और सीधे तौर पर झील की जलधारण क्षमता कम करेगी।

खरपतवार अंदर ही छोड़ दी

झील से निकाली गई खरपतवार को बाहर ले जाने के बजाय किनारों और सूखे हिस्सों में ही छोड़ दिया गया। अब यह खरपतवार सड़-गल रही है। इससे दुर्गंध फैल रही है और आसपास टहलने आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़ती हुई खरपतवार हानिकारक जीवाणुओं को जन्म देती है और सूखने के बाद मिट्टी में बदलकर फिर झील की भराव क्षमता कम करती है।--

स्कूल के सामने नाला बना खतरा

मस्तान बाबा कॉलोनी क्षेत्र में स्कूल के सामने से झील में जाने वाला नाला भी चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। नाले में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट जमा है। यदि समय रहते इसकी सफाई नहीं हुई तो मानसून में यह पूरा कचरा सीधे फतहसागर में पहुंचेगा।

मानसून शुरू होने से पहले झील पेटे में पड़े मिट्टी के ढेर, जलीय खरपतवार और प्लास्टिक कचरे को तत्काल हटाया जाना चाहिए। साथ ही झील में गिरने वाले नालों की सफाई कर आसपास से कचरा फेंकने वालों पर भी सख्ती जरूरी है।

तेजशंकर पालीवाल, पूर्व झील विकास प्राधिकरण सदस्य

Published on:
19 Jun 2026 06:08 pm