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CA Final Result: उदयपुर के मंतव्य व्यास ने बताया सफलता का मूलमंत्र, पढ़ें मनन, प्रणव, कनिष्क और आयुषी की सक्सेस स्टोरी

ICAI CA Final Result 2026: उदयपुर के स्टूडेंट्स ने सीए फाइनल परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया। मंतव्य व्यास ने सफलता हासिल कर सिटी टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने सफलता का श्रेय निरंतरता, अनुशासित अध्ययन और परिवार के सहयोग को दिया। मनन, प्रणव, कनिष्क और आयुषी सहित कई छात्रों ने भी उत्कृष्ट परिणाम हासिल कर उदयपुर का नाम रोशन किया।

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Udaipur CA Topper Success Story

परिवार के साथ मंतव्य व्यास (पत्रिका फोटो)

Udaipur CA Topper Success Story: द इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की ओर से सीए फाइनल परीक्षा (मई 2026) का परिणाम गुरुवार को घोषित कर दिया गया। इस बार का परिणाम उदयपुर के लिए गौरवान्वित करने वाला रहा। आईसीएआई उदयपुर शाखा के अध्यक्ष सीए चिराग धर्मावत ने बताया कि इस बार उदयपुर से 405 विद्यार्थी सीए फाइनल की परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से 79 विद्यार्थियों ने सफलता का परचम लहराया। उदयपुर संभाग के चावंड घुमार के मूल निवासी आयुष आमेटा ने अखिल भारतीय स्तर पर 39वीं रैंक हासिल कर समूचे अंचल को गौरवान्वित किया है।

सीए क्रैक करने की एकमात्र स्ट्रेटजी है 'कंसिस्टेंसी'

सीए फाइनल परीक्षा में 390 अंक हासिल कर उदयपुर के सिटी टॉपर बने मंतव्य व्यास ने सफलता का श्रेय निरंतरता को दिया है। पिता गगन व्यास का कपड़ों का बिजनेस है और मां डॉ. हेमलता आमेटा सरकारी स्कूल में टीचर हैं। मंतव्य ने बताया कि उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी को इसलिए चुना, क्योंकि यह क्षेत्र मात्र चार साल में बेहतरीन फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और नॉलेज प्रदान करता है।

परीक्षा को पास करने की रणनीति पर वे कहते हैं कि इसकी एकमात्र कुंजी कंसिस्टेंसी है। वे अपनी पढ़ाई को लेकर इतने अनुशासित थे कि यदि किसी दिन कोई टॉपिक छूट जाता था, तो उसे अगले दिन हर हाल में कवर करते थे। मुख्य परीक्षा से पहले के आखिरी दो महीनों में वे रोजाना 8 से 9 घंटे पढ़ाई करते थे।

मंतव्य ने बताया, वे खुद को तनावमुक्त रखने के लिए दोस्तों के साथ बैडमिंटन खेलते थे और आउटिंग पर भी जाते थे। भविष्य की योजनाओं को लेकर मंतव्य ने बताया कि वे अभी कुछ समय तक कॉर्पोरेट इंडस्ट्री में काम करना चाहते हैं, उसके 5 साल बाद वे खुद की सीए प्रैक्टिस शुरू करेंगे।

सेल्फ मोटिवेशन रहा सफलता का मंत्र

उदयपुर के अशोक नगर निवासी मनन देवपुरा ने अपने पहले ही प्रयास में सीए फाइनल में शहर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। मनन के पिता कमल देवपुरा मार्बल व्यवसायी हैं और मां प्रवीणा गृहिणी हैं। कोर फाइनेंस में रुचि रखने वाले मनन का मानना है कि सीए के लिए 12-12 घंटे रटने की जरूरत नहीं है, बल्कि रोजाना 6-7 घंटे की नियमित और बिना ब्रेक वाली पढ़ाई जरूरी है।

तनाव दूर करने के लिए वे रोज यूट्यूब देखते थे और खेलकूद में भाग लेते थे। वे अब कैंपस प्लेसमेंट के जरिए किसी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करना चाहते हैं। उनका कहना है कि सही दिशा में प्रयास से ही सफलता मिलती है।

मजबूत आधार के साथ हासिल की तीसरी रैंक

उदयपुर के प्रणव बनोड़िया ने भी सीए फाइनल परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में शहर में तीसरी रैंक हासिल की है। उन्होंने वर्ष 2022 से सीए की तैयारी शुरू की थी और कड़ी मेहनत के बल पर फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल, तीनों चरणों को एक बार में पार कर लिया।

प्रणव के पिता भुवन बनोड़िया की आयुर्वेदिक दवा की फैक्ट्री है और मां आरएमवी के सेंट्रल ऑफिस में हेड अकाउंटेंट हैं। प्रणव का विश्वास है कि सीए की डिग्री किसी भी युवा के कॅरियर को बेहद मजबूत आधार देती है। भविष्य की योजनाओं को लेकर बताते हैं कि वे आगे चलकर खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं।

वित्तीय स्थिरता के लिए बनना था सीए

उदयपुर के मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले कनिष्क अग्रवाल ने सीए फाइनल परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में शहर में चौथा स्थान प्राप्त कर परिवार का नाम रोशन किया है। पिता नवीन अग्रवाल हाउसहोल्ड गुड्स (घरेलू सामान) का बिजनेस करते हैं और मां सुषमा गृहिणी हैं।

वर्ष 2021 से इस कठिन सफर की शुरुआत करने वाले कनिष्क ने बताया कि वे हमेशा से एक ऐसे कॅरियर में जाना चाहते थे, जो उन्हें समाज में सम्मान दिलाने के साथ-साथ मजबूत वित्तीय स्थिरता भी प्रदान करे, चार्टर्ड अकाउंटेंसी इस सपने के लिए सबसे सटीक माध्यम था।

पहले ही प्रयास में बनीं सीए

विज्ञान की छात्रा आयुषी जोशी ने बीएससी करने के बाद पहले ही प्रयास में शहर में 5वीं रैंक हासिल कर मिसाल कायम की है। आयुषी ने वर्ष 2021 में सुखाड़िया विवि से बीएससी की थी। वे यूपीएससी की तैयारी करना चाहती थीं, लेकिन परिजन ने उन्हें दिल्ली नहीं भेजा।

इसी बीच जब वे छोटी बहन का सीए कोचिंग में एडमिशन कराने गईं तो वहां काउंसलिंग के दौरान उन्होंने खुद भी सीए करने का फैसला कर लिया। शुरुआत में उनके लिए डेबिट, क्रेडिट और टैक्सेशन जैसे शब्दों को समझना चुनौतीभरा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

सीए फाउंडेशन में 400 में से 299 अंक हासिल करने के बाद, उन्होंने आर्टिकलशिप के दौरान पढ़ाई के लिए रात का समय चुना। एक सामान्य किराना व्यवसायी पिता रमेश जोशी और गृहिणी मां हेमलता की बेटी आयुषी अब बिजनेस शुरू करना चाहती हैं।

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