
उदयपुर. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के संघटक और राजस्थान के एकमात्र सरकारी कॉलेज ऑफ फिशरीज की शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह बेपटरी हैं। कॉलेज में विशेषज्ञ डीन की नियुक्ति न होने, फैकल्टी की कमी और रिसर्च वर्क ठप होने से राज्य में मत्स्य शिक्षा का भविष्य खतरे में है। इस कॉलेज में 2020 में पीएचडी और 2022 में पीजी कोर्स बंद कर दिए गए, इसके बाद अब यहां केवल यूजी कोर्स की 45 सीटों की पढ़ाई ही संचालित हो रही है। यूजी के बाद छात्रों को इसी विषय में पढ़ाई जारी रखने के लिए पढ़ने के लिए 2000 किमी दूर जाना पड़ रहा है।
2021- 25 बैच के यूजी स्टूडेंट दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर
इस कॉलेज में फैकल्टी की कमी का कारण बताकर 2020 में पीएचडी और 2022 में पीजी कोर्स बंद कर दिया गया। इसके बाद जिन स्टूडेंट्स ने फिशरीज से यूजी किया उन्हें राज्य में दूसरा कोई कॉलेज न होने के कारण दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ा। 2021- 25 बैच के 33 स्टूडेंट्स ने यूजीकम्पलीट किया। इनमें से 1 को 2000 किमी दूर इंफाल में कॉलेज मिला, 4 बिहार में, 2 हिसार और 1-1 यूपी और महाराष्ट्र गए। बाकी ने या तो कोर्स बदल लिया या फिर निजी संस्थानों में एडमिशन ले लिया।
स्टूडेंट बोले: हमारे साथ धोखा हुआ
2025 में नागौर के किशन राड़ की यूजीकम्पलीट हुई। उनका कहना है कि 2022 में कॉलेज में एडमिशन के वक्त प्लानिंग थी कि जम कर पढ़ाई करनी है, ताकि यहीं मास्टर्स में भी दाखिला हो जाए लेकिन 2022 में ही पीजी कोर्स में नए दाखिले लेना बंद कर दिया। यूजी होने के बाद 2 ऑप्शन थे कि मैं अपना कोर्स बदल लूं या फिर दूसरे राज्यों में कॉलेज देखूं। विवि प्रशासन ने हमारे साथ धोखा किया।
इंटरव्यू आरसीए डीन के लिए दिया, बना दिया फिशरीज का
कॉलेज में डीन के पद पर पिछली तीन नियुक्तियां गैर-संबंधित विषयों जैसे हॉर्टिकल्चर व एक्सटेंशन के प्रोफेसरों की हुई। हाल ही में हॉर्टिकल्चर बैकग्राउंड से आने वाले डॉ. एन.एल. महावर को डीन नियुक्त किए गए हैं। डीन की नियुक्ति इंटरव्यू कमेटी ने की, जिसमें वीसी भी मौजूद थे। जिन्हें डीन बनाया उन्हाेंने इस पद के लिए अप्लाई ही नहीं किया था। उन्होंने आरसीए के डीन के लिए इंटरव्यू दिया था। पर आरसीए का डीन एनिमल हसबेंडरी विभाग के प्रोफेसर को डीन बनाया गया जो फिशरीज के डीन बनाए जा सकते थे। पर उन्हें राज्यपाल के आदेश के उलट आरसीए का डीन बनाया गया।
10 में से केवल दो स्थायी शिक्षक, रिटायरमेंट से और गहराएगा संकट
कॉलेज में स्वीकृत 10 फैकल्टी पदों में से वर्तमान में सिर्फ दो स्थायी शिक्षक कार्यरत हैं, इनमें से एक अगले वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले हैं। पीजी और पीएचडी में रिसर्च गाइड के लिए स्थायी फैकल्टी अनिवार्य होती है, लेकिन 2010 में सरकारी मान्यता मिलने के बाद से अब तक नई भर्तियां न के बराबर हुई हैं। फैकल्टी न होने से सरकारी योजनाओं के तहत खरीदे गए लाखों रुपए के अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण कमरों में बंद धूल फांक रहे हैं।
छात्राओं के उच्च शिक्षा के विकल्प बंद
पीजी- पीएचडी बंद होने का सबसे गंभीर असर छात्राओं पर पड़ रहा है। आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ रहा है। यहां से पढ़ीं कई मेधावी व गोल्ड मेडलिस्ट छात्राएं राज्य से बाहर जाने की अनुमति न मिलने के कारण उच्च शिक्षा से वंचित हो रही हैं।