
चंदनसिंह देवड़ा/ उदयपुर . शहर की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से एक के बाद एक शह-मात का खेल चल रहा है। अब कुराबड़ पंचायत समिति प्रधान और उपप्रधान के खिलाफ अविश्वास पेश कर दिया गया। जिला परिषद् सीईओ अविचल चतुर्वेदी के समक्ष कुराबड़ पंचायत समिति सदस्य गजेन्द्र रेगर ने प्रधान और गुलाब सिंह ने उपप्रधान के खिलाफ पांच सदस्यों की मौजूदगी में अविश्वास पेश किया। चुपचाप यह सदस्य अविश्वास पेश करके निकल गए और किसी को भनक तक नहीं लगने दी लेकिन बात बाहर आ गई।
राजनीतिक हलकों में इसके बाद सुगबुगाहट तेज हो गई कि आखिर इसके पीछे की वजह क्या है। अविश्वास पेश करने वाले सदस्य भी बिना मीडिया के सामने आए अपना काम करके चलते बने। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि यह प्रधान अस्मां खा और उपप्रधान की ही एक चाल है। वह नहीं चाहते की कोई उनके खिलाफ अविश्वास लाए उससे पहले ही खुद अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर इसे खारिज करवा दिया जाए ताकि उसके दो साल बाद तक कोई अविश्वास लाने की स्थिति में नहीं आए और अपनी कुर्सी बची रह जाए। यह सब इसलिए हुआ है कि नई बनी कुराबड़ पंचायत समिति में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें से हाल ही में बिछड़ी जिंक पंचायत समिति सीट पर उपचुनाव हुए जिसमें भाजपा की तुलसा कुंवर चुनाव जीत गई। इस जीत के बाद कुराबड़ पंचायत समिति में भाजपा के 11 और कांग्रेस के 4 सदस्य हो गए। इससे पहले कांग्रेस के पास पांच सदस्य थे। कुराबड़ प्रधान अस्मा खान पठान के ससुर नत्थे खान भाजपा के नेता हैं लेकिन प्रधान पद पर उनकी बहु को पार्टी ने टिकट नहीं दिया।
ऐसे में बाहरी समर्थन से आपसी समझ से अस्मा को निर्दलीय रूप से कुराबड़ प्रधान भी बना दिया और यहां भाजपा अंदरूनी विरोध से भी बच गई। अब जब भाजपा के पास 11 सदस्य हो गए तो कुराबड़ पंचायत समिति में अंदर ही अंदर अविश्वास की सुगबुगाहट गर करने लगी। प्रधान और उनके राजनीतिक सलाहकारों को लगा की कहीं राजनीति तिकड़मबाज उनकी सीट नहीं खा जाए तो क्यों न चाल अपनी ओर से ही चल ली जाए। हुआ भी ऐसा ही लग रहा है। यह लोगों को आने वाले समय में नजर भी आ जाएगा। लेकिन इस अविश्वास प्रस्ताव के पेश होने के बाद सोते हुए नाग चेत गए हैं वह इस कोशिश में जुट गए हैं कि कोशिश करके क्यों न इस चाल को उल्टा पटक दिया जाए। यह पंचायत समिति भी वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र में आती है जहां राजनीति की खिचड़ी बनाता कौन है औ खा कौन जाता है यह कोई नहीं जानता है। इस राजनीतिक ड्रामे को समझने मे ज्यादा दिक्कत यूं भी नही होनी चाहिए कि अस्मां खान प्रधान के विश्वस्त गजेन्द्र रेगर और उपप्रधान के साथ बैठने वाले गुलाबसिंह ने ही उनके खिलाफ अविश्वास पेश किया है।