
साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए राहत की खबर। फोटो: एआई
उदयपुर। साइबर ठगी के शिकार लोगों की रकम वापस दिलाने के में मामले राजस्थान देश के बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में है। पुलिस विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में रिकवरी दर 36 प्रतिशत है, जबकि गुजरात में यह 38 प्रतिशत है। इस लिहाज से राजस्थान दूसरे स्थान पर है और महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश से आगे है। प्रदेश में साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के बावजूद ठगी की रकम और शिकायतों का बढ़ता ग्राफ चिंता बढ़ा रहा है।
पिछले साढ़े तीन वर्षों में 3 लाख से अधिक सिम कार्ड और 1.46 लाख से ज्यादा मोबाइल आइएमईआइ नंबर ब्लॉक किए गए। इसके बावजूद साइबर ठगी की रिपोर्ट की गई रकम करीब 2308 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इससे साफ है कि केवल कार्रवाई ही नहीं, ठगी की रकम को समय रहते रोककर पीड़ितों तक वापस पहुंचाना भी जरूरी है।
राजस्थानः 1509.13 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हुई, जिसमें से 183.39 करोड़ रुपए खातों में रोके गए।
गुजरातः पिछले साल 2745.90 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हुई, जिसमें से 556.98 करोड़ रुपए खातों में रोके गए।
एक लाख या इससे अधिक की ठगी के मामलों में जीरो एफआइआर दर्ज करने की व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य शुरुआती कार्रवाई में तेजी लाना है।
राजस्थान में साइबर ठगी के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में साइबर ठगी से जुड़ी 77,680 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 354.71 करोड़ रुपए की ठगी हुई। वर्ष 2024 में शिकायतों का आंकड़ा एक लाख से अधिक पहुंच गया और ठगी की राशि बढ़कर 796.56 करोड़ रुपए हो गई। वर्ष 2025 में साइबर ठगी की 1,27,782 शिकायतें दर्ज की गईं। इस दौरान ठगी की कुल राशि 768.46 करोड़ रुपए रही। वहीं, वर्ष 2026 में जुलाई तक 96,886 शिकायतें सामने आ चुकी हैं और 387.53 करोड़ रुपए की ठगी दर्ज की गई है।
| वर्ष | शिकायतों की संख्या | ठगी की राशि |
|---|---|---|
| 2023 | 77,680 | 354.71 करोड़ रुपए |
| 2024 | 1 लाख से अधिक | 796.56 करोड़ रुपए |
| 2025 | 1,27,782 | 768.46 करोड़ रुपए |
| 2026 (जुलाई तक) | 96,886 | 387.53 करोड़ रुपए |
म्यूल अकाउंट साइबर ठगी की बड़ी वजह हैं। इन पर सख्ती से कार्रवाई की जाए तो रिकवरी दर बढ़ सकती है। राजस्थान के मेवात क्षेत्र में म्यूल अकाउंट के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई हुई है। हालांकि, इनके बारे में आमजन में अब भी जागरूकता की कमी है। पिछले कुछ वर्षों में सख्ती बढ़ी है और पुलिस की सक्रियता से सफलता मिली है। कार्रवाई के साथ आमजन को जागरूक करना भी जरूरी है।
-पंकज चतुर्वेदी, आइटी प्रोफेशनल
Updated on:
18 Oct 2026 09:45 am
Published on:
18 Oct 2026 09:45 am
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