
Bकांकरोली मैन चौपाटी से जल चक्की तक शाम होते ही सिमट जाता है रास्ता, अस्थायी अतिक्रमण, बेतरतीब पार्किंग और आवारा पशु बढ़ा रहे परेशानीB
Bराजसमंद. Bसुबह का समय... सड़क खुली-खुली। वाहन अपनी रफ्तार से दौड़ते हुए। राहगीर आसानी से गुजरते हुए। लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता है और बाजार खुलता है, इस सड़क की तस्वीर बदलने लगती है। दुकानों के बाहर बोर्ड आ जाते हैं। थड़ियां सड़क किनारे सज जाती हैं। वाहन बेतरतीब तरीके से खड़े हो जाते हैं और धीरे-धीरे सड़क के दोनों किनारे आगे बढ़ते चले जाते हैं। फिर शाम होते-होते हालात ऐसे बन जाते हैं कि जिस सड़क पर दिनभर हजारों वाहन आसानी से गुजरते हैं, उसी सड़क पर वाहन रेंगने लगते हैं। यह हाल है शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल कांकरोली मैन चौपाटी से जल चक्की तक की सड़क का।
Bएक सड़क... दो तस्वीरें... फर्क साफB
सड़क वही है। जगह वही है। लेकिन तस्वीर दो हैं। एक तस्वीर सुबह की, जब सड़क खुली नजर आती है। दूसरी बाजार खुलने के बाद की, जब सड़क के दोनों किनारों पर अस्थायी अतिक्रमण बढ़ता चला जाता है। सड़क इतनी चौड़ी कि देखकर लगता है यहां यातायात की कोई समस्या नहीं हो सकती। लेकिन बाजार खुलते ही सड़क की चौड़ाई अतिक्रमण और पार्किंग में सिमट जाती है। दुकानों के बाहर लगे बोर्ड, सड़क किनारे खड़ी थड़ियां और दुकानों के आगे बेतरतीब खड़े वाहन राहगीरों के लिए मुश्किल खड़ी कर देते हैं। हर कोई सड़क पर आगे निकलने की कोशिश करता है और इसी के बीच यातायात का दबाव बढ़ता जाता है।
Bसड़क पर दुकानों का प्रचार, रास्ता घटता गयाB
शहर के इस प्रमुख मार्ग पर अस्थायी अतिक्रमण अब रोजमर्रा की तस्वीर बनता जा रहा है। दुकान के बाहर रखा सामान, सड़क तक पहुंचते बोर्ड और किनारे खड़ी थड़ियां धीरे-धीरे सड़क की सीमा में आगे बढ़ती नजर आती हैं। नतीजा बाजार बढ़ता गया और राहगीरों के लिए रास्ता घटता गया।
Bपार्किंग की समस्या ने बढ़ाई परेशानीB
अतिक्रमण के साथ दुकानों के आगे बेतरतीब खड़े वाहन भी यातायात व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं। कोई वाहन सड़क किनारे खड़ा है तो कोई दुकान के ठीक सामने। ऐसे में आने-जाने वाले वाहनों के लिए जगह कम पड़ जाती है। शाम के समय यातायात का दबाव बढ़ने पर कई बार जाम जैसी स्थिति बन जाती है। राहगीरों को भी सड़क के बीच से निकलना पड़ता है।
Bअब पशु भी बन रहे यातायात की चुनौतीB
इस मार्ग पर विचरण करते पशु भी समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। कई बार सड़क पर पशु आपस में भिड़ जाते हैं और वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं। इससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
Bजिम्मेदारों की चुप्पी... शहर की परेशानीB
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब समस्या रोज सामने है तो समाधान की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे? अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती भी है तो कुछ समय बाद हालात फिर वही हो जाते हैं। अस्थायी अतिक्रमण हटाना आसान है, लेकिन उसे दोबारा नहीं पनपने देना असली चुनौती है।
Bअस्थायी अतिक्रमण रोकने के लिए क्या करेंB
स्थायी मार्किंग: दुकानों के बाहर सामान रखने की सीमा सड़क पर स्पष्ट रूप से चिन्हित की जाए।
- नियमित कार्रवाई: नगर परिषद और प्रशासन की ओर से नियमित निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए।
-दोबारा अतिक्रमण पर सख्ती: एक बार कार्रवाई के बाद दोबारा अतिक्रमण करने वालों पर जुर्माना और नियमानुसार सख्त कार्रवाई हो।
-व्यवस्थित पार्किंग: प्रमुख बाजार मार्गों पर वाहनों की पार्किंग के लिए अलग स्थान तय किए जाएं।
- थड़ियों के लिए निर्धारित स्थान: अस्थायी दुकानदारों और थड़ी संचालकों को व्यवस्थित वेंडिंग जोन उपलब्ध कराया जाए।
- सीसीटीवी और निगरानी: प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी के जरिए निगरानी रखी जाए, ताकि अतिक्रमण दोबारा न हो।
- व्यापारी-प्रशासन समन्वय: व्यापारियों के साथ बैठक कर यातायात और बाजार व्यवस्था के लिए सामूहिक समाधान तैयार किया जाए।
- दुकानों के आगे एंगल: अस्थायी अतिक्रमण रोकने के लिए व्यापारियों की दुकानों के आगे एंगल लगाए जाएं।
Bक्या कहते हैं जिम्मेदार...B
वैसे तो कोई शिकायत आदि आती है तो अतिक्रमण नियमित रूप से हटाते हैं। लेकिन फिर भी कहीं ऐसा है तो वापस अभियान चलाएंगे।
विजेश मंत्री, आयुक्त, नगर परिषद, राजसमंद