शहर से सटी एक ग्राम पंचायत की दादागीरी देखिए कि यूआईटी की जमीन पर इंटर लॉकिंग टाइल लगवा कर चौक बनवा दिया जिससे वहां से निकल रही 60 फीट सडक़ और प्रस्तावित 100 फीट सडक़ का रास्ता बंद हो गया। इस क्षेत्र पर यूआईटी के इंजीनियर व पटवारी निगरानी रखते हैं लेकिन उनको इसकी भनक तक नहीं लगी। मामला गिर्वा पंचायत समिति की सविना खेड़ा ग्राम पंचायत के नेला गांव का है, जिसके पथवारी क्षेत्र में स्थिति महादेव चौक पर टाइल्स जड़ दी गई है।
उदयपुर. शहर से सटी एक ग्राम पंचायत की दादागीरी देखिए कि यूआईटी की जमीन पर इंटर लॉकिंग टाइल लगवा कर चौक बनवा दिया जिससे वहां से निकल रही 60 फीट सडक़ और प्रस्तावित 100 फीट सडक़ का रास्ता बंद हो गया। इस क्षेत्र पर यूआईटी के इंजीनियर व पटवारी निगरानी रखते हैं लेकिन उनको इसकी भनक तक नहीं लगी। मामला गिर्वा पंचायत समिति की सविना खेड़ा ग्राम पंचायत के नेला गांव का है, जिसके पथवारी क्षेत्र में स्थिति महादेव चौक पर टाइल्स जड़ दी गई है। राजस्व रिकॉर्ड में सविना खेड़ा का आराजी नंबर 861 नंबर यूआईटी उदयपुर के नाम दर्ज है। इस जमीन को पंचायत ने टाइल्स लगवा कर चारों तरफ से घेर लिया है। चौक का लोकार्पण ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा एवं गिर्वा प्रधान तख्तसिंह शक्तावत ने किया। इसका पहले क्षेत्रवासियों ने विरोध किया लेकिन बाद में यह कहा गया कि यह तो गांव के विकास के लिए किया जा रहा है, कोई रास्ता नहीं रोका जाएगा।
गलती सचिव की, विरोध करने पर धमकाया
क्षेत्रवासियों ने बताया कि जब यह काम चल रहा, तब ग्राम सचिव हेमप्रकाश प्रजापत को बताया था कि गलत काम हो रहा है, यूआईटी की जमीन पर कब्जा है। उन्होंने बताया कि सचिव ने गलती मानने के बजाय उनसे कहा कि काम मत रुकवाए वरना जेल जाएंगे।
यूआईटी चेयरमैन से भी शिकायत
क्षेत्रवासियों ने यूआईटी चेयरमैन एवं जिला कलक्टर आनंदी को भी पूरी स्थिति बताते हुए इसकी पूरी जांच करवाने की मांग रखी।
यूआईटी ने पट्टे तक दिए
यूआईटी का एक प्लान है जिसके राजस्व ग्राम सविना खेड़ा के नेला में आराजी नंबर 858, 859, 863, 870, 871, 875, 876, 877 हैं। क्षेत्रवासियों ने बताया कि इन आराजी को यूआईटी ने रूपांतरित कर वर्ष 2002 में पट्टे दिए। यूआईटी ने निर्माण स्वीकृति के बाद विकास के नाम पर राशि भी जमा की परन्तु आज तक वहां सडक़ व नाली का निर्माण नहीं हुआ।
मनमर्जी से बने जमीन के मालिक
आराजी नंबर 861 की जमीन यूआईटी की है। इसके पास ही यूआईटी के प्लान में आने-जाने का 60 फीट (लेआउट में) की नेला गांव की तरफ खुलती कच्ची रोड है, जो टाइल्स लगाकर बंद कर दी गई है। अब इस रास्ते से स्कूल बस या अन्य निजी वाहन नहीं जा सकता है। लोगों ने इसका विरोध किया तो पंचायत उनको हाइवे वाले रास्ते से निकलने की सीख दे रही है।
नहीं ली स्वीकृति
आठ लाख रुपए की लागत से यह कार्य करवाया है। जमीन की मालिक यूआईटी है लेकिन पंचायत तो काम करवा सकती है। आबादी बढऩे के साथ पंचायत विकास तो करवाएगी। अगर यह काम सांसद व विधायक मद से होता है तो यूआईटी से स्वीकृति लेते। हमने कोई स्वीकृति यूआईटी से नहीं ली है। - हेमप्रकाश प्रजापत, सचिव सविना खेड़ा
जब से रह रहे इसी रास्ते से आ-जा रहे : क्षेत्रवासी
जब से हमें यूआईटी ने पट्टे दिए हैं, तब से हम इसी रास्ते से जा रहे हैं। टाइल्स लगाने के बाद रास्ता बंद हो गया, यह यूआईटी की जमीन पर कब्जा है। हाइवे वाला रास्ता भी है लेकिन वहां हादसे की आशंका रहती है इसलिए बच्चों से लेकर बड़े सब जहां टाइल्स लगाई हैं, उस रास्ते से आते-जाते रहे हैं।
नरेश खत्री, दिनेश खराड़ी, गुलबीर सिंह, हीरालाल मीणा, ओमप्रकाश नंदवाना (क्षेत्रवासी)