
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. उदयपुर में प्लाज्मा लैब खुले कई माह हो गए, लेकिन अभी तक कोरोना संक्रमितों के जीवन में उजियारा करने वाले प्लाज्मा पुंज गिने चुने ही हैं। आरएनटी की लैब में 27 अगस्त को पहला प्लाज्मा दान किया गया था। इसे करने वाले रोनक सुहालका थे। इसके बाद अब तक यानी ढाई माह में केवल 151 लोग ही प्लाज्मा देने के लिए आगे आए हैं। हालांकि कुछ लोग जो प्लाज्मा देने पहुंचे थे, वे इन मापदंडों पर खरे नहीं उतर सके। हाल में आईसीएमआर ने प्लाज्मा के परिणाम संतोषजनक नहीं बताए हैं, लेकिन इस डोनेशन पर रोक नहीं है, अभी भी कोई भी प्लाज्मा दान कर सकता है, इसके लिए बस मन से आगे आना होगा।
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किसी भी ऐसे कोरोना संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति से प्लाज्मा लिया जाता है, जिसे ठीक हुए 28 दिन पूरे हो चुके हों। इस मरीज से एक यूनिट यानी 400 एमएल प्लाज्मा लिया जाता है, इसे 200-200 एमएल के दो पार्ट बनते हैं। एक बार में 200 एम एल प्लाज्मा चढ़ाया जाता है। दूसरी यूनिट 24 घंटे बाद चढाई जा सकती है।
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ये होते हैं टेस्ट
इसमें सबसे पहले मरीज की एंटीबॉडी देखी जाती है। साथ ही कोरोना से ठीक हुए मरीज में सीबीसी, टोटल सिरम प्रोटीन, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी व सी, मलेरिया, साइफिलिस का टेस्ट किया जाता है। प्लाज्मा हल्का पीले रंग का होता है। इसे - 30 डिग्री सेल्सियस के नीचे तापमान पर एक वर्ष के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
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अब तक प्लाज्मा की उदयपुर में स्थिति
- कुल प्लाज्मा दान- 151
- प्लाज्मा संग्रहण- 300
- कुल मरीज लाभान्वित- 270
- कुल यूनिट जारी किए- 286
- कितने मरीजों को दो यूनिट चढ़े- 14
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प्लाज्मा दान करने वाले अब तक काफी कम आए हैं। प्रयास कर रहे हैं, अपील अभी भी जारी है, लेकिन हाल में आईसीएमआर की ओर से प्लाज्मा का माकूल प्रभाव कोरोना में नहीं होने की बात का भी असर जरूर हुआ है।
डॉ भागचंद रेगर, नोडल ऑफिसर प्लाज्मा बैंक आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर