
सिकन्दर पारीक/उदयपुर. राजनीति में परिवार और वंशवाद की जड़ें काटना मुश्किल है। भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के अब तक घोषित नामों से यह साफ है। लेकिन, पारिवारिक कारण से ही सही, डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा सीट पर भाजपा नेता व पूर्व मंत्री कनकमल कटारा ने खुद अपनी पुत्रवधू का टिकट कटवा दिया। करीब 28 साल से भाजपा का टिकट इस सीट पर कनकमल परिवार में ही जाता रहा है, लेकिन इस बार खुद कनकमल ने टिकट अपनी पुत्रवधू विधायक अनीता कटारा की बजाय नए चेहरे शंकरलाल डेचा को दिलवाया। बताते हैं कि पार्टी को उन्होंने गारंटी दी है कि वे डेचा को जितवा कर लाएंगे। दीगर है कि अनीता ने न केवल बगावत का झंडा उठा लिया है, बल्कि इशारों-इशारों में ससुर कनकमल पर निशाना साध चुकी हैं।
परिवारवाद का पोषक सागवाड़ा
आजादी के बाद दशकों तक कांग्रेस के स्व. भीखाभाई का सागवाड़ा सीट पर एकछत्र राज रहा। उनके बाद बेटे सुरेंद्र बामनिया को टिकट मिला, हारे तो ताराचंद भगोरा को आजमाया गया, पर भगोरा हारे तो अब वापस बामनिया को टिकट दे दिया गया। भाजपा ने 1980 में पहली बार सागवाड़ा से हीरालाल को अपना प्रत्याशी बनाया था। 1985 के चुनाव में हरजीभाई को उम्मीदवारी सौंपी। इसके बाद 1990 से 2008 तक हुए पांच चुनावों में लगातार कनकमल कटारा ही यहां 'कमल' का पर्याय रहे। हालांकि इसमें 2003 को छोड़ कर शेष सभी चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा ने कनकमल कटारा का टिकट काट कर उनकी पुत्रवधू अनीता कटारा को प्रत्याशी बनाया और सीट जीती। इस बार के चुनाव में अनीता का टिकट काट कर नए चेहरे के तौर पर शंकरलाल डेचा को अवसर दिया है।
पहले जहां मर्जी अंगूठे लगवाए, मना किया तो कटवाया टिकट
परिवार से टिकट बाहर जाने में स्वयं कनकमल कटारा की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। अनीता ने नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोगों ने अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए पांच साल पहले नौकरी छुड़वा कर मुझसे चुनाव लड़वाया। जीतने पर शुरुआती दौर में जहां मर्जी हो, वहां अंगूठे लगवाए। राजनीतिक समझ आने पर ऐसे अंगूठे लगाने से इनकार कर दिया तो अब टिकट कटवा दिया।
निर्दलीय लडऩे के लिए गुमराह किया जा रहा है विधायक को
यह पार्टी का मामला है। पार्टी दो साल से सर्वे करा रही थी। आलाकमान को जो फीडबैक मिला, उसे मैंने स्वीकारोक्ति दी। टिकट मेरे परिवार को नहीं मिला, यह मायने नहीं रखता। पार्टी संगठन का निर्णय अहम है। जहां तक मुझ पर आरोप लगाने की बात है, तो कुछ लोग निजी स्वार्थों के कारण विधायक को गुमराह कर निर्दलीय चुनाव लड़वा रहे हैं।
उदयपुर संभाग में वंशवाद की बेल
जनजाति उपयोजना क्षेत्र के ही प्रतापगढ़ में भाजपा ने नंदलाल मीणा का टिकट काट कर उनके पुत्र हेमंत मीणा को प्रत्याशी बनाया है।
डूंगरपुर के चौरासी में इस बार भी पूर्व मंत्री भाजपा के जीवराम कटारा के पुत्र सुशील को टिकट मिला।
कांग्रेस सागवाड़ा में दिवंगत नेता और पूर्व मंत्री भीखाभाई भील के परिवार तक ही सीमित है। यहां 2003 में कांग्रेस ने परिवारवाद को तोड़ते हुए ताराचंद भगोरा को टिकट दिया था, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई थी। भीखाभाई के पुत्र सुरेन्द्र बामनिया को टिकट फिर दी है। उदयपुर ग्रामीण सीट से कांग्रेस ने पूर्वमंत्री स्व. खेमराज कटारा की पत्नी सज्जन कटारा की बजाय इस बार उनके बेटे विवेक कटारा को टिकट दिया।