शहर की झीलों को गहरा करने के नाम पर गत दिनों इनसे गाद निकालने का काम किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों की राय बगैर ही फतहसागर पेटे में कच्ची चट्टानों को खोद दिया जिससे रिसाव water leakage होने का खतरा बढ़ गया है। नगर विकास प्रन्यास ने गत माह फतहसागर से गाद निकालने का काम किया। गाद की निकासी बड़ी मार्ग और रानी रोड वाले छोर पर किया गया। रानी रोड वाले छोर पर कच्ची चट्टानों को भी खोद दिया गया। ऐसे में आने वाले समय में जब झील में पानी भरेगा तो रिसाव का खतरा बढऩे की संभावना भी बढ़ गई है।
उदयपुर . शहर की झीलों को गहरा करने के नाम पर गत दिनों इनसे गाद निकालने का काम किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों की राय बगैर ही फतहसागर पेटे में कच्ची चट्टानों को खोद दिया जिससे रिसाव होने का खतरा बढ़ गया है। नगर विकास प्रन्यास ने गत माह फतहसागर fateh sagar lake से गाद निकालने का काम किया। गाद की निकासी बड़ी मार्ग और रानी रोड वाले छोर पर किया गया। रानी रोड वाले छोर पर कच्ची चट्टानों को भी खोद दिया गया। ऐसे में आने वाले समय में जब झील में पानी भरेगा तो रिसाव का खतरा बढऩे की संभावना भी बढ़ गई है।
ट्यूबवैल से खाली हुआ था फतहसागर
वर्ष 1985 से 88 तक उदयपुर में अकाल के हालात पैदा हुए थे। उस दौरान जलदाय विभाग की ओर से फतहसागर के पेटे में बड़े ट्यूबवैल खोदे गए थे। इन अकाल के दौरान इन ट्यूबवैल से शहर में पेयजल सप्लाई की गई थी। इसके बाद 1988 में अच्छी बारिश हुई और फतहसागर में पानी भरा गया। यह पानी तेजी से खत्म हुआ तो जांच में सामने आया कि पेटे में खोदे गए ट्यूबवैल से पानी भूमिगत स्रोतों में समा गया। इसके बाद इन ट्यूबवैल को पुन: बंद किया गया।
टापुओं की मिट्टी का क्या भरोसा
जानकारों के अनुसार फतहसागर में एक निजी कंपनी के साथ मिलकर प्रशासन ने पक्षियों के नाम पर टापू बनाए हैं। इनको चट्टानों और मिट्टी से बना दिया गया है। जब झील में पानी भरेगा तो ये टापू सुरक्षित रहेंगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है। झील में महाराणाओं के समय बनाए गए भवन और पार्क भी आसपास पक्की दीवार बनाकर खड़े किए गए हैं। पानी से इन कृत्रिम टापुओं को नुकसान पहुंचने की पूरी संभावना है।
एक्सपर्ट व्यू...
कहीं भी खुल सकती है शिराएं
झील के पेटे की कच्ची चट्टानों से छेड़छाड़ किसी भी स्थिति में सुरक्षित नहीं है। प्राकृतिक शिराएं कहीं भी खुल सकती है। ऐसा होने पर झील का पानी तेजी से भूमिगत हो जाएगा। झीलों में कोई भी कार्य किया जाता है तो जल संसाधन विभाग व झीलों के जानकार लोगों से सलाह लेनी चाहिए। फतहसागर झील में कहीं भी नदी का सीधा पानी नहीं समाता। ऐसे में इसमें गाद की मात्रा भी काफी कम है। मदार छोटा-बड़ा से थूर, चिकलवास होते हुए पानी फतहसागर में पहुंचता है तो दूसरी ओर देवास, नांदेश्वर, पिछोला एवं स्वरूप सागर होकर पानी यहां आता है। इससे अधिकांश गाद मार्ग के अन्य तालाबों में ही बैठ जाती है।
- प्रो. महेश शर्मा, वेटलैंड टास्क फोर्स के पूर्व सदस्य।