उदयपुर

संस्कृत सिर्फ विरासत नहीं, रोजगार और तकनीक की नई भाषा

Aug 11, 2026
Rajasthan

ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताए करियर के बदलते अवसर
राजसमंद. संस्कृत को लेकर बनी पारंपरिक धारणा से आगे बढ़ते हुए सेठ रंगलाल कोठारी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजसमंद में विद्यार्थियों को इसके आधुनिक और रोजगारपरक स्वरूप से रूबरू कराया गया। संस्कृत विभाग की ओर से ‘संस्कृत विषय क्यों पढ़ें?’ विषय पर एक दिवसीय विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन बड़ोला ने की। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी सांस्कृतिक विरासत के साथ विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास, तार्किक चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम है। मुख्य वक्ता सहायक आचार्य संस्कृत विजेन्द्र कुमार शर्मा ने संस्कृत के अध्ययन से जुड़ी पारंपरिक और आधुनिक संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्कृत का दायरा अब केवल अध्यापन और अनुवाद तक सीमित नहीं है। यूपीएससी, आरपीएससी एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध, योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, डिजिटल कंटेंट, पांडुलिपि विज्ञान, कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स तथा एआई जैसे क्षेत्रों में भी इसके अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल एक विषय नहीं, बल्कि अवसरों की भाषा के रूप में देखना चाहिए। विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य और प्राचीन शास्त्रों के अध्ययन के साथ आधुनिक तकनीक एवं रोजगार के क्षेत्र में संस्कृत की बढ़ती उपयोगिता से परिचित कराया गया। एनएसएस के जिला समन्वयक डॉ. गोपाललाल कुमावत ने संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना तथा कंप्यूटर और आधुनिक तकनीकी क्षेत्र में इसकी संभावनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में खुशबू, भवानी सिंह, रेणु एवं डॉ. गरिमा यादव सहित महाविद्यालय के संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Updated on:
11 Aug 2026 06:01 am
Published on:
11 Aug 2026 06:01 am