
उदयपुर. देश के टैक्स कानूनों में आ रहे बड़े बदलावों और नए आयकर अधिनियम, 2025 की बारीकियों पर मंथन करने के लिए शुक्रवार को झीलों की नगरी में देशभर के सीए दिग्गजों का जमावड़ा रहा। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आइसीएआइ) की उदयपुर शाखा के तत्वावधान में निजी रिसॉर्ट में दो दिवसीय डायरेक्ट टैक्स नेशनल कॉन्फ्रेंस चरैवेति का शुभारंभ हुआ। 13 जून तक चलने वाले इस राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन देशभर के 600 से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कर सलाहकारों, वकीलों और आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
अल्फा-न्यूमेरिक सेक्शन खत्म, लेकिन 88 संशोधन फिर जुड़े
आइसीएआई की डायरेक्ट टैक्स कमेटी के वाइस चेयरमैन सीए पंकज शाह ने बताया कि नया आयकर अधिनियम 2025 बेहद सरल भाषा में तैयार किया है। नए कानून में जटिल 'अल्फा-न्यूमेरिक' सेक्शन को पूरी तरह खत्म कर धारा 1 से 536 तक लगातार (सीधी गिनती में) कर दिया है। हालांकि, नए एक्ट के लागू होने से ठीक पहले फाइनेंस एक्ट 2026 के माध्यम से इसमें फिर से 88 संशोधन कर कुछ सेक्शन जोड़ दिए गए, जिससे साफ है कि सिस्टम धीरे-धीरे पुराने ढर्रे पर ही लौट आता है। उन्होंने सीए मेंबर्स को सलाह दी कि सिर्फ टेबल देखकर क्लाइंट को राय न दें, बल्कि हर चैप्टर के पीछे लिखे इंटरप्रिटेशन कॉलम को जरूर पढ़ें।
सीए के लिए विदेशी आउटसोर्सिंग और वसीयत बनाना कमाई की नई खदान
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के सामने आ रहे काम के संकट पर बोलते हुए सीए शाह ने चौंकाने वाला आंकड़ा रखा। उन्होंने बताया कि देश के साढ़े चार लाख सीए में से 62% अब अपनी स्वतंत्र प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं वे नॉन-प्रैक्टिसिंग हो चुके हैं और इंडस्ट्री के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में फॉरेन अकाउंटिंग आउटसोर्सिंग (विदेशों का हिसाब-किताब भारत में बैठकर संभालना) एक बेहतरीन विकल्प है। उन्होंने बताया कि कुछ सीए देश के छोटे कस्बों में बैठकर विदेशों का आउटसोर्सिंग काम संभाल रहे हैं। अमरीका में जो काम 200 डॉलर प्रति घंटा में होता है, उसे भारतीय सीए महज 40 डॉलर में तीन गुना मुनाफे के साथ करके दे रहे हैं।
उन्होंने केवल टैक्स ऑडिट पर निर्भर रहने के बजाय 'सक्सेशनप्लानिंग'
उत्तराधिकार योजना और विल (वसीयत) बनाने के क्षेत्र में काम करने की सलाह दी। उन्होंने एक दिलचस्प कानूनी नियम बताया कि यदि कोई व्यक्ति शादी से पहले अपनी वसीयत बनाता है, तो शादी होते ही वह वसीयत अपने आप अमान्य (इनवैलिड) हो जाती है।
क्लाइंट भी ले रहे एआइ का सहारा, सीए को होना होगा अपग्रेड
तकनीकी सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज चैटजीपीटी या जेमिनी जैसे टूल्स का इस्तेमाल आम क्लाइंट भी कर रहे हैं। क्लाइंट खुद इनकम टैक्स के नोटिस की पीडीएफ इन टूल्स में डालकर सीए को ड्राफ्टिंग बदलने की सलाह देने लगे हैं। ऐसे में सीए को खुद एआइ तकनीक में आगे रहना होगा। आयकर विभाग को सोशल मीडिया और ई-मेल खंगालने की जो नई ताकतें मिली हैं, उसके कानूनी दायरे पर भी विचार साझा किए। इस पर एक्सपर्ट ने कहा कि रोज रात को सोने से पहले आपको दिनभर में क्या नए तकनीकी बदलाव हुए उन सब से अपडेट होना पड़ेगा। फ्री के एआइ टूल की बजाय पेड वर्जन को चुनें।
असेसमेंट और टैक्स प्लानिंग पर भी चर्चा
इससे पहले उद्घाटन सत्र में उदयपुर शाखा अध्यक्ष सीए चिराग धर्मावत ने सभी का स्वागत किया। प्रोग्राम डायरेक्टर सीए रोहित रुवाटिया ने संस्थान के प्रयासों और प्रोग्राम कन्वीनर सीए हितेश भदादा ने रूपरेखा रखी। वंडर सीमेंट के एवीपी सीए ऋषभ जैन और एकमेफिनट्रेड के सीएमडी निर्मल कुमार जैन ने टैक्स सिस्टम में बढ़ते डिजिटलाइजेशन को रेखांकित किया। अन्य सत्रों में दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट डॉ. कपिल गोयल ने असेसमेंट व री-असेसमेंट के तकनीकी पहलुओं को समझाया। जयपुर के सीए रवि ममोड़िया और सीए शिशिर अग्रवाल ने वसीयत के व्यावहारिक नियमों पर प्रकाश डाला। अंत में सीए अरुणा गेलड़ा ने आभार जताया। इस दौरान सीए सौरभ गोलछा, सीए हिमांशु लोढ़ा, सीए कपिल कुमार जोशी सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।