उदयपुर में वन विभाग की मदद से 200 से ज्यादा आदिवासी महिलाएं जंगल की वन औषधियों से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। इसके साथ ही पहली बार गोबर के कंडों की मालाएं भी बनाईं हैं। चार समितियां इस काम को संभाल रहीं हैं। प्रदेशभर में इस हर्बल गुलाल की डिमांड है।
Udaipur News: होली का त्योहार खुशियों और रंगों का प्रतीक है, लेकिन इस बार आदिवासी महिलाओं के लिए यह पर्व खुशहाली की दोहरी सौगात लेकर आ रहा है। जंगल की गोद में पली वन औषधियों से तैयार हर्बल गुलाल की डिमांड बढ़ने से 200 से ज्यादा आदिवासी महिलाओं के घरों में स्वावलंबन की खुशबू महक उठी है।
वन विभाग की ओर से विभिन्न वन मंडलों पर करीब 18 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कराया जा रहा है। गुलाल के ऑर्डर स्थानीय स्तर पर भी आ रहे हैं तो जयपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में इसकी मांग है। हर्बल गुलाल साढ़े चार सौ रुपए प्रति किलो के दाम पर बेचा जा रहा है।
इस बार होली में एक नई पहल भी देखने को मिल रही है। आदिवासी महिलाओं ने होलिका दहन के लिए गोबर की मालाएं तैयार की है। पारंपरिक गोबर के कंडों को सूत में पिरोकर बनाई यह माला होली जलाने में उपयोगी होगी।
वन विभाग ने ये मालाएं महिलाओं से तैयार कराई हैं, जिन्हें हर्बल गुलाल के साथ बिक्री के लिए रखा जाएगा। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय का नया जरिया मिलेगा। विभिन्न वन मंडलों में करीब 1000 से ज्यादा मालाएं तैयार की गई है।
उदयपुर जिले में आदिवासी महिलाओं की चार समितियां हर्बल गुलाल निर्माण में जुटी हैं। यह गुलाल पलाश सहित विभिन्न वन औषधीय फूलों को सुखाकर पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से तैयार किया जाता है। इस कार्य में वन निगम की ओर से कच्चा माल, प्रशिक्षण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग तक में सहायता दी जा रही है। उदयपुर साउथ मंडल के कोडियात क्षेत्र में बड़े स्तर पर हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है।
हर्बल गुलाल और कंडों की माला से आदिवासी महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। इस गुलाल की प्रदेशभर में डिमांड है। प्राकृतिक रंग शरीर के लिए भी नुकसानदायक नहीं होते। कोडियात वन नाका पर गुलाल तैयार किया जा रहा है। - अजय चित्तौड़ा, उपवन संरक्षक, उदयपुर साउथ मंडल