उदयपुर

उदयपुर नगर निगम चुनाव : घोषणा-पत्रों में झांकिए तो सही, उदयपुर के असली दर्द कहीं गायब हैं!

उदयपुर नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के घोषणा-पत्रों में विकास के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। भाजपा का नगरीय विकास संकल्प-पत्र राज्यव्यापी है, जिसमें सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग, पीएनजी, पिंक टॉयलेट और आवासीय भूखंड जैसे वादे हैं। कांग्रेस ने उदयपुर-केंद्रित घोषणा-पत्र में झील संरक्षण, आयड़ नदी की सफाई, आहड़ सभ्यता, रिवरफ्रंट, मेवाड़ी संस्कृति और विरासत को प्राथमिकता दी है। हालांकि दोनों दलों के दस्तावेजों में ट्रैफिक जाम, जलभराव, रोजगार, अवैध निर्माण, मास्टर प्लान, गर्मी के जल संकट और बोटिंग सुरक्षा जैसे रोजमर्रा के गंभीर मुद्दों पर ठोस योजना नजर नहीं आती।
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Updated: 8 Sep 2026, 6:17 PM IST
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उदयपुर. नगर निगम चुनाव से पहले जारी हुए भाजपा और कांग्रेस के घोषणा-पत्रों की तुलना करने पर एक दिलचस्प फर्क सामने आया है, दोनों दलों ने विकास का वादा तो किया है, लेकिन नजरिया बिल्कुल अलग है।

भाजपा राजस्थान की ओर से जारी नगरीय विकास संकल्प-पत्र पूरी तरह राज्यव्यापी दस्तावेज है, जो प्रत्येक निकाय में शब्दों के साथ राज्य के सभी निगम-परिषदों के लिए एक जैसा लागू होता है। इसमें बिजली लाइनें भूमिगत करना, स्मृति वन, ओपन जिम, कचरा वाहनों की ट्रैकिंग, पार्किंग स्थल, इनडोर स्टेडियम, पिंक टॉयलेट, एलईडी लाइट, वेंडिंग जोन, फूड कोर्ट, आवासीय भूखंड और घरेलू पीएनजी कनेक्शन जैसे बिंदु शामिल हैं। पूरे दस्तावेज में उदयपुर की झीलों, रिवरफ्रंट, आहड़ सभ्यता या मेवाड़ी संस्कृति का कोई खास उल्लेख नहीं है, यानी यह टेम्पलेट किसी भी शहर पर फिट बैठ सकता है।

इसके उलट कांग्रेस का घोषणा-पत्र पूरी तरह उदयपुर-केंद्रित है। पार्टी ने पिछोला, फतहसागर, उदयसागर झीलों के प्रदूषण नियंत्रण, ऐतिहासिक रिवरफ्रंट के पुनरुद्धार, 4000 वर्ष पुरानी आहड़ सभ्यता व आयड़ नदी की सफाई, गुलाबबाग व राजीव गांधी पार्क को डिजनीलैंड तर्ज पर विकसित करने, फिल्म सिटी टाउनशिप और मेवाड़ी भाषा-संस्कृति संरक्षण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी है।

पार्टियां 'दिखनेवाले' इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित

भाजपा और कांग्रेस, दोनों ने वादों की झड़ी लगा दी है, जिसमें सड़कें, लाइटें, पार्किंग, झीलें, रिवर फ्रंट, वेंडिंग जोन से लेकर पिंक टॉयलेट तक शामिल किए हैं। लेकिन, शहर के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करने वाले कई बड़े मुद्दे दोनों ही घोषणा-पत्रों से नदारद हैं। यह गैर मौजूदगी बताती है कि पार्टियां 'दिखनेवाले' इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित रहीं, जबकि शहर की जड़ की समस्याओं को छुआ तक नहीं गया।

मुद्दे, जिनका जिक्र नहीं

- शहर में यातायात व्यवस्था बेकार हो चुकी है, वहीं पार्किंग संकट गंभीर समस्या है।

- बरसात में कई सड़कें तालाब बन जाती हैं, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम की योजना नहीं है।

- युवाओं को रोजगार के लिए पार्टियों का स्थानीय प्रयास किए नहीं बताए गए हैं।

- अवैध निर्माण, कॉलोनियों की भरमार, लेकिन मास्टर प्लान पर कोई बात नहीं।

- गर्मी में होने वाले जल संकट का स्थायी हल दोनों घोषणा-पत्रों में अनुपस्थित है।

- लेकसिटी होने के बावजूद बोटिंग सुरक्षा मानकों या दुर्घटना रोकथाम का जिक्र नहीं।

रोजमर्रा के मुद्दे रह गए हाशिये पर

दोनों पार्टियां चुनावी दृष्टि से गिनाने लायक वादों पर ज्यादा टिकी रहीं। चाहे वह भाजपा का राज्यव्यापी टेम्पलेट हो या कांग्रेस का विरासत-केंद्रित एजेंडा, जबकि नागरिकों की रोज़मर्रा की परेशानियां जैसे ट्रैफिक जाम, जलभराव, स्वास्थ्य ढांचा और रोजगार की गुणवत्ता जैसे मसले हाशिये पर रह गए।

दोनों दलों में कुछ समानताएं भी

दोनों ने पार्किंग नीति, हरियाली-ग्रीन बेल्ट, ई-लाइब्रेरी/वाई-फाई, महिला सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं, गरीबों को आवासीय भूखंड और वेंडरों के कल्याण का वादा किया है। लेकिन, जहां भाजपा का जोर बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, वहीं कांग्रेस ने विरासत, पर्यावरण और मौजूदा बोर्ड की जवाबदेही को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है।

भाजपा के प्रमुख वादे

भाजपा ने अगले 5 वर्षों में राज्यभर में एक लाख आवासीय भूखंड आवंटन, 3000 किमी पुरानी सीवरेज लाइनों की मरम्मत, 15 लाख नई स्ट्रीट लाइट, 2000 पिंक टॉयलेट और 7 लाख घरों में पीएनजी कनेक्शन का लक्ष्य रखा है। नक्शा योजना के तहत भूमि अभिलेख भी डिजिटल किए जाएंगे।

कांग्रेस के प्रमुख वादे

कांग्रेस ने हर वार्ड में निःशुल्क स्वास्थ्य क्लीनिक, 272 विवादित प्लॉटों का त्वरित निस्तारण, नाइट-विज़न सीसीटीवी से महिला सुरक्षा, ईस्टर्न इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, रिंग रोड-सैटेलाइट टाउन और यूडी टैक्स की समीक्षा कर उसे तर्कसंगत बनाने का वादा किया है।

Updated on:
8 Sep 2026, 6:17 PM IST
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