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उदयपुर : पासा फेंकते ही खुलेगी किताबों की दुनिया, पढ़ेंगे भी और अपनी बात भी कहेंगे बच्चे

राजसमंद के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नेगड़िया में शिक्षक दिवस पर ‘रीडिंग डाइस चैलेंज’ शुरू किया गया। इस अभिनव पहल में बच्चों को खेल के माध्यम से किताबों से जोड़ा जाएगा।
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उदयपुर

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Mukesh Gaur

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Updated: 8 Sep 2026, 5:07 PM IST

रीडिंग डाइस चैलेंज

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मधुसूदन शर्मा @ राजसमंद. आमतौर पर किताब खोलते ही बच्चों के सामने पढ़ाई का दबाव आ जाता है, लेकिन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नेगड़िया में अब किताबों की दुनिया कुछ अलग अंदाज में खुलेगी। यहां विद्यार्थी पासा फेंकेंगे, बोर्ड पर आगे बढ़ेंगे, किताब चुनेंगे, पढ़ेंगे, सवालों के जवाब देंगे और अपनी रचनात्मकता भी दिखाएंगे। शिक्षक दिवस पर विद्यालय में शुरू हुआ ‘रीडिंग डाइस चैलेंज’ पठन को खेल, चुनौती, चिंतन और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ने वाली अभिनव पहल है।

चार पासे और पढ़ने की पूरी कहानी

इस खेल की सबसे खास बात इसके चार शैक्षिक पासे हैं। संख्या पासा विद्यार्थी को बोर्ड पर आगे बढ़ाएगा। पुस्तक श्रेणी पासा तय करेगा कि विद्यार्थी कविता, कहानी, विज्ञान, जीवनी, कॉमिक्स या सामान्य ज्ञान में से किस तरह की पुस्तक से जुड़ेगा। इसके बाद गतिविधि पासा विद्यार्थी के सामने नई चुनौती रखेगा। उसे सस्वर वाचन करना पड़ सकता है, मुख्य विचार बताना पड़ सकता है, चित्र बनाना, सारांश लिखना, किसी पात्र की भूमिका निभाना या पुस्तक का परिचय देना पड़ सकता है। चौथा है चिंतन पासा, जो विद्यार्थी को सिर्फ पढ़ने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि पढ़ी गई सामग्री पर सोचने के लिए प्रेरित करेगा।

30 पड़ाव... हर पड़ाव पर नई चुनौती

खेल के बोर्ड में प्रारंभ से समापन तक 30 गतिविधि पड़ाव बनाए गए हैं। यानी हर बार पासा फेंकने के साथ पढ़ने की यात्रा में नया मोड़ आएगा। बोर्ड में पठन सितारा, आश्चर्य उपहार, रॉकेट बढ़त, खुली पुस्तक, सहयोगी हाथ, विराम बिंदु, दोबारा पासा फेंकें और विजेता बोनस जैसे विशेष स्थान भी बनाए गए हैं। यही विशेष पड़ाव खेल में रोमांच और उत्साह बढ़ाते हैं।

पढ़ेंगे भी... सोचेंगे भी... और बोलेंगे भी

‘रीडिंग डाइस चैलेंज’ की खासियत यह है कि विद्यार्थी पुस्तक पढ़कर उसे बंद नहीं करेगा, बल्कि पढ़ी हुई सामग्री के बारे में अपनी बात भी रखेगा। उसे मुख्य विचार, सारांश, पात्र, तथ्य और अपनी पसंद के बारे में बताना होगा। कहीं कहानी का नया अंत लिखना होगा तो कहीं पुस्तक का परिचय देना होगा। किसी गतिविधि में पुस्तक की सिफारिश करनी होगी, तो किसी में प्रश्न तैयार करने, चित्र बनाने या पात्र की भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। इस पूरी प्रक्रिया से विद्यार्थियों की पठन समझ, शब्द-भंडार, कल्पनाशक्ति, रचनात्मक सोच, बोलने की क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करने का अवसर मिलेगा।

अंक भी मिलेंगे, बनेगा ‘पठनविजेता’

खेल में विद्यार्थियों के उत्साह को बनाए रखने के लिए अंक व्यवस्था भी रखी गई है। पुस्तक पढ़ने, गतिविधि पूरी करने, सही उत्तर देने, रचनात्मक प्रतिक्रिया देने, समय पर कार्य पूरा करने, समूह में सहयोग करने और पुस्तक की उचित देखभाल करने पर अंक दिए जाएंगे। विशेष बोनस गतिविधियों से विद्यार्थी अतिरिक्त अंक भी हासिल कर सकेंगे। खेल के अंत में बेहतर प्रदर्शन करने वाला विद्यार्थी ‘पठनविजेता’ बनने का गौरव हासिल करेगा।

2 से 6 विद्यार्थी एक साथ खेल सकेंगे

यह खेल समूह आधारित गतिविधि के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 2 से 6 विद्यार्थी एक साथ भाग ले सकते हैं। शिक्षक या पुस्तकालयाध्यक्ष खेल के संचालन और गतिविधियों के मूल्यांकन में सहयोग कर सकता है। खेल को लगभग 30 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकता है। ऐसे में इसे विद्यालय की पुस्तकालय अवधि या विशेष पठन गतिविधि के दौरान आसानी से संचालित किया जा सकेगा।

शुभारंभ में विद्यार्थियों ने खुद आजमाया खेल

शुभारंभ अवसर पर विद्यार्थियों को ‘रीडिंग डाइस चैलेंज’ का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया गया। विद्यार्थियों ने स्वयं पासे फेंके और बोर्ड पर आगे बढ़ते हुए अलग-अलग गतिविधियां पूरी कीं। उन्होंने पुस्तक पढ़कर मुख्य विचार बताए, प्रश्नों के उत्तर दिए और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया। विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव इसलिए भी अलग रहा क्योंकि पढ़ना उन्हें सामान्य अध्ययन गतिविधि के बजाय खेल और चुनौती जैसा लगा।

प्रधानाचार्य बोले: पढ़ने की आदत विकसित करने का रोचक माध्यम

विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. घनश्याम सिंह राठौड़ ने कहा कि ‘रीडिंग डाइस चैलेंज’ विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने का रोचक और अभिनव माध्यम है। इससे बच्चे पढ़ने के साथ समझने, सोचने और अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने के लिए प्रेरित होंगे। खेल के विकसितकर्ता एवं डिजाइनर डॉ. नवीन छापरवाल ने बताया कि इसका उद्देश्य पढ़ने को आनंददायक और सक्रिय अनुभव बनाना है। खेल, चुनौती और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को पुस्तकों से जोड़कर पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।