
उदयपुर. नगर निगम चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मेयर की कुर्सी को लेकर है। पार्टी के भीतर अनुभवी नेताओं से लेकर नए चेहरों तक कई नामों पर चर्चा शुरू हो गई है। दावेदार राजनीतिक अनुभव, संगठन में पकड़, सामाजिक समीकरण और वरिष्ठ नेताओं से नजदीकी के आधार पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इनमें पूर्व उपमहापौर से लेकर संगठन के पुराने पदाधिकारी और युवा चेहरे तक शामिल हैं। सबसे अहम बात यह होगी कि पार्टी नेतृत्व जातीय-सामाजिक समीकरण, वरिष्ठता, संगठन की पसंद और स्थानीय राजनीतिक संतुलन में किसे प्राथमिकता देता है।
जानें प्रमुख दावेदारों का गणित
महेंद्र सिंह शेखावत : वार्ड 75, पुला
जीत : 51 वोट, 3836 में से 1798 वोट
पूर्व उपमहापौर रहे महेंद्र सिंह शेखावत मेयर की दौड़ में अनुभव और सामाजिक समीकरण के आधार पर मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे प्रदेश सदस्य भी रह चुके हैं और बांसवाड़ा जिले के प्रभारी के रूप में पार्टी संगठन में जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वसुंधरा राजे और राजेंद्र राठौड़ के करीबी माने जाने के साथ शहर विधायक से भी उनकी नजदीकी बताई जाती है। राजपूत समाज में प्रमुख चेहरा होना उनकी दावेदारी का बड़ा आधार है। एलएलबी शिक्षित और 62 वर्षीय शेखावत की बेदाग छवि तथा लाइजनिंग क्षमता भी प्लस पॉइंट है। चुनाव जीतने के बाद करीब 25 पार्षदों का समर्थन बताया जा रहा है।
क्यों मजबूत? पूर्व उपमहापौर, राजपूत समाज में प्रभाव, बेदाग छवि और वरिष्ठ नेताओं से संपर्क।
किसका समर्थन? वसुंधरा राजे-राजेंद्र राठौड़ से नजदीकी, शहर विधायक से संबंध और करीब 25 पार्षदों का समर्थन।
क्या अड़चन? जैन समाज को प्राथमिकता मिलने की स्थिति।
दिनेश भट्ट : वार्ड 45, सवीना
जीत : 497 वोट, 3329 में से 1540 वोट
भाजपा संगठन में लंबे अनुभव के कारण दिनेश भट्ट की दावेदारी अलग तरह से मजबूत है। वे करीब दस साल तक जिलाध्यक्ष और महामंत्री जैसे पदों पर रहे तथा कभी लाभ के पद पर नहीं आए। बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के प्रभारी के रूप में भी संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाली। सतीश पूनिया और ओम बिरला से उनकी नजदीकी बताई जाती है। ब्राह्मण समाज के प्रमुख चेहरे और 68 वर्ष की उम्र में लंबा राजनीतिक अनुभव उनकी ताकत है। एमए और शिक्षण पृष्ठभूमि वाले भट्ट को चुनाव के बाद करीब 20 पार्षदों का समर्थन बताया जा रहा है। निर्विवाद और बेदाग छवि उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
क्यों मजबूत? लंबा संगठनात्मक अनुभव, वरिष्ठता और निर्विवाद छवि।
किसका समर्थन? सतीश पूनिया, ओम बिरला से नजदीकी और करीब 20 पार्षदों का समर्थन।
क्या अड़चन? उम्र की अधिकता।
प्रमोद सामर : वार्ड 51, दुर्गा नर्सरी रोड
जीत : 1366 वोट, 3265 में से 2158 वोट
प्रमोद सामर की दावेदारी का आधार उनका लंबा राजनीतिक अनुभव और संगठन में लगातार सक्रियता है। वे पार्टी में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं और वर्तमान में सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष हैं। निगम में समिति अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। विभिन्न जिलों के प्रभारी के रूप में संगठनात्मक अनुभव उनके पक्ष में जाता है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह से नजदीकी तथा स्थानीय सांसद और विधायक से संबंध भी उनकी राजनीतिक पहुंच को मजबूत करते हैं। जैन समाज में वरिष्ठता और करीब 30 पार्षदों के समर्थन को उनकी दावेदारी के पक्ष में माना जा रहा है। 67 वर्षीय सामर स्नातक हैं और सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं।
क्यों मजबूत? वरिष्ठता, लंबा राजनीतिक अनुभव और वर्तमान में प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी।
किसका समर्थन? अमित शाह से नजदीकी, स्थानीय सांसद-विधायक से संबंध और करीब 30 पार्षदों का समर्थन।
क्या अड़चन? जैन समाज से मेयर नहीं बनाने का फैसला।
पारस सिंघवी : वार्ड 24, धानमंडी
जीत : 1680 वोट, 3218 में से 2449 वोट
पूर्व डिप्टी मेयर और वर्तमान शहर महामंत्री पारस सिंघवी मेयर की रेस में संगठन और निगम के अनुभव के दोहरे आधार पर दावेदारी रखते हैं। वे निगम में डिप्टी मेयर रह चुके हैं और पार्टी में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। ओम माथुर और ओम बिरला से नजदीकी के साथ स्थानीय सांसद और विधायक से भी उनके संबंध बताए जाते हैं। जैन समाज में वरिष्ठता, व्यापार संगठन और संघ में सक्रियता उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा है। बीकॉम शिक्षित और 62 वर्षीय सिंघवी होटल व्यवसाय से जुड़े हैं। चुनाव के बाद करीब 25 पार्षदों का समर्थन बताया जा रहा है। उनकी जमीनी पकड़ और राजनीतिक अनुभव मजबूत पक्ष हैं।
क्यों मजबूत? पूर्व डिप्टी मेयर, जमीनी पकड़ और संगठन में वर्तमान जिम्मेदारी।
किसका समर्थन? ओम माथुर-ओम बिरला से नजदीकी, स्थानीय सांसद-विधायक से संबंध और करीब 25 पार्षद।
क्या अड़चन? जैन समाज को प्राथमिकता नहीं मिलने की स्थिति।
अतुल चंडालिया : वार्ड 78, नवरत्न कॉम्प्लेक्स
जीत : 1122 वोट, 4174 में से 2648 वोट
अतुल चंडालिया बाकी दावेदारों से अलग अपेक्षाकृत युवा चेहरा हैं। 48 वर्षीय चंडालिया वर्तमान में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हैं और इससे पहले मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के रिश्तेदार होने के कारण उनका नाम पार्टी के पुराने राजनीतिक नेटवर्क से भी जुड़ता है। जैन समाज में पहचान, स्थानीय सांसद-विधायक से संबंध और चुनाव के बाद करीब 25 पार्षदों का समर्थन उनकी दावेदारी के पक्ष में माना जा रहा है। 12वीं तक शिक्षित चंडालिया माइनिंग व्यवसाय से जुड़े हैं। निगम में उनका पिछला अनुभव नहीं है, लेकिन मिलनसार और युवा चेहरा होना उनकी ताकत है।
क्यों मजबूत? युवा चेहरा, मिलनसार व्यक्तित्व और प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी।
किसका समर्थन? कटारिया परिवार से संबंध, स्थानीय सांसद-विधायक से नजदीकी और करीब 25 पार्षदों का समर्थन।
क्या अड़चन? निगम का पूर्व अनुभव नहीं और जैन समाज से मेयर बनाने का फैसला निर्णायक।