
Udaipur Molestation Case: उदयपुर जिले के कानोड़ शहर में सरकारी अनुदानित कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र के संचालक पर प्रशिक्षण ले रही छात्राओं के साथ छेड़छाड़, गलत हरकत की कोशिश, मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में पीड़ित छात्राओं ने आईजी और एसपी को शिकायत भेजकर केंद्र संचालक सहित अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। छात्राओं ने अपनी शिकायत के समर्थन में पुलिस को ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपने का दावा किया है।
शिकायत के अनुसार, कानोड़ में कोठारी टॉकीज और बैंक भवन में संचालित प्रशिक्षण केंद्र के संचालक देवीलाल जाट पर छात्राओं को परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने का झांसा देकर अपने कार्यालय में बुलाने का आरोप है। छात्राओं का कहना है कि कार्यालय में बुलाने के बाद उनके साथ आपत्तिजनक हरकतें करने की कोशिश की जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संचालक की ओर से अनुचित दबाव बनाया जाता था, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान थीं।
शिकायत में केंद्र की एक ट्रेनर और कुछ अन्य महिला कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्राओं का आरोप है कि ये कर्मचारी उन पर दबाव बनाकर उन्हें संचालक के पास भेजती थीं। छात्राओं ने पूरे मामले की जांच कराकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
छात्राओं ने पुलिस को मामले से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपने का दावा किया है। उनके अनुसार, एक रिकॉर्डिंग में संचालक कथित तौर पर अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग रहा है। वहीं, दूसरी रिकॉर्डिंग में ट्रेनर और एक छात्रा के बीच बातचीत होने का दावा किया गया है। इन रिकॉर्डिंग की वास्तविकता और उनमें दर्ज बातचीत की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
छात्राओं का कहना है कि उन्होंने इससे पहले भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत की थी, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर निलंबन या अन्य प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से संचालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी और केंद्र में नया बैच भी शुरू कर दिया गया।
छात्राओं ने आशंका जताई है कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर अन्य बालिकाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अब शिकायत के आधार पर मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना भी जरूरी है।