उदयपुर

चलती फिरती वेन ने इलाज के नाम पर जो पैसे उठाए, उससे तो गांवों में खड़े हो जाते कई नए अस्पताल

- जिले में 17 मोबाइल वेन को इस वर्ष करीब तीन करोड़ का बजट - गत कई वर्षों से चल रही है ये वेन, करोड़ों रुपए की धूल धाणी - जिले में 195 ग्राम पंचायतों में नहीं है उप स्वास्थ्य केन्द्र, मोटे खर्च की दौड़ रही एमएमवी - चिकित्सा विभाग ढाक रहा है पुराने खर्च पर पर्दा

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Nov 12, 2021
चलती फिरती वेन ने इलाज के नाम पर जो पैसे उठाए, उससे तो गांवों में खड़े हो जाते कई नए अस्पताल

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. राज्य सरकार की मेडिकल मोबाइल वेन (एमएमवी) गांव-गांव ढाणी-ढाणी पहुंचकर भले ही ग्रामीणों के बेहतर इलाज का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत कोसो दूर है। आज भी जहां स्वास्थ्य सुविधा नहीं है उन ग्राम पंचायत मुख्यालयों के मरीज उपचार को तरस रहे हैं, वे इलाज के लिए मुख्यालय के अस्पतालों तक दौड़ लगा रहे हैं। प्रतिदिन उदयपुर श हर अस्पतालों में ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की आउटडोर करीब दो से ढाई हजार आ रही है। इन्ही मरीजों के इलाज पर उदयपुर में अब तक मोबाइल वेन साल में करीब तीन करोड़ रुपए उठा रही है। ये मोबाइल वेन ग्रामीण क्षेत्रों में किन मरीजों का उपचार कर रही है, कौनसी दवा दे रही है, उसका अब तक तक इनका रिकॉर्ड भी इनके पास नहीं है। अब तक सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इलाज के नाम पर इतनी राशि उठ चुकी है कि उनसे इन गांवों में अस्पताल खड़े हो जाते। ये बात दीगर है कि चिकित्सा विभाग इस वेन पर कब से कितना खर्च हुआ ये बताने को राजी नहीं है, जाने क्यों इस पर पर्दा ढांका जा रहा है।

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ये मोबाइल वेन उन ग्राम पंचायतों के लिए शुरू की गई है, जहां उप स्वास्थ्य केन्द्र नहीं है। जिले में 195 ग्राम पंचायत मुख्यालय ऐसे हैं, जहां उप स्वास्थ्य केन्द्र नहीं होने से विभाग द्वारा ये मोबाइल वेन चलाकर लोगों को इलाज देने के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इनकी गत वर्षों में भी जांच को लेकर विभाग किसी प्रकार की जानकारी नहीं होने की दलील दे रहा है।

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ये है नियम-

प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र की जनता को चिकित्सा सुविधा उपलब्‍ध करवाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा ग्रामीण जनसंख्‍या आधारित निर्धारित मानदण्‍ड के अनुसार 1 लाख की ग्रामीण जनसंख्‍या पर 1 सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खोले जाने का प्रावधान है। सामान्‍य क्षेत्र में 30 हजार एवं जनजाति, रेगिस्‍तानी क्षेत्रों में 20 हजार की ग्रामीण जनसंख्‍या पर 1 प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खोले जाने का प्रावधान है।- सामान्‍य क्षेत्र में 5 हजार एवं जनजाति, रेगिस्‍तानी क्षेत्रों में 3 हजार की ग्रामीण जनसंख्‍या पर 1 उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खोले जाने का प्रावधान है।

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195 मुख्यालयों पर नहीं है उप स्वास्थ्य केन्द्र ...ये है पंचायत समितियां व उनमें ग्राम पंचायतों की संख्या

उदयपुर में उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र से वंचित 195 ग्राम पंचायत मुख्‍यालय है। जिसमें बडग़ांव 4, भींडर 4, गिर्वा 13, गोगुन्दा 11, जयसमन्द 6, झाड़ोल 15, झल्लारा 10, खेरवाड़ा 17, कोटड़ा 37, कुराबड़ 3, लसाडिय़ा 9, मावली 4, नया गांव 10, फलासिया 11, ऋषभदेव 12, सलूम्बर 7, सराड़ा 7, सायरा 7, सेमारी 5, वल्लभनगर पंचायत समिति के 3 ग्राम पंचायत मुख्यालय शामिल हैं।

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2021-22 में उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों से वंचित ग्राम पंचायत मुख्‍यालयों पर चरणबद्ध रूप से उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खोले जाने की घोषणा की गई है।

- वर्तमान में उदयपुर जिले में कुल 17 पंचायत समितियां है । जिनमें से 9 पंचायत समितियों पर मोबाइल मेडिकल वाहन और 8 एमएमवी सेवाप्रदाता के माध्‍यम से उपलब्‍ध होना बताया जा रहा है। वेन में एक डॉक्टर, एक ड्राइवर,1 जीएनएम, 1 लैब टेक्नीशियन व फार्मासिस्ट के जाने के नियम हैं।

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अप्रेल 21 से मार्च 22 तक का स्वीकृत बजट:

जिले की 9 एमएवी के लिए वर्षभर का बजट 1 करोड़ 45 लाख 26000

प्रति एमएमवी -134500 (प्रति माह एमएमवी के लिए जारी बजट)

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8 एमएवी, प्रत्येक एमएमवी के लिए-1 लाख 49,650 रुपए प्रति माह (ट्रंकी बेसिस)

कुल 8 एमएमवी के लिए वर्षभर का बजट 1 करोड़ 43 लाख 66400

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- दोनों की मिलाकर 17 वाहनों के लिए कुल बजट 2 करोड़ 88 लाख 92400

- पूरे राजस्थान में 289 एमएमवी के लिए 46 करोड़ 26 लाख 75 हजार 192 रुपए का बजट जारी किया है।

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जिले में 17 एमएमवी (मेडिकल मोबाइल वेन) फिलहाल चल रही है, एमएमयू (मेडिकल मोबाइल यूनिट) एक भी नहीं है। पूर्व वर्षों में खर्च हुआ बजट निकालने में समय लगेगा।

डॉ दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ उदयपुर

Published on:
12 Nov 2021 08:16 am
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