उज्जैन

नवरात्रि : अष्टमी पर 27 किलोमीटर तक चढ़ेगी मदिरा की धार, वर्ष में दो बार होता है आयोजन

श्रद्धालु करेंगे कुलदेवी का पूजन, कन्या भोज का आयोजन भी

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Oct 16, 2018
patrika
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उज्जैन. नवरात्रि में बुधवार को महाष्टमी की पूजा होगी। घरों में लोग अष्टमी पर कुलदेवी का पूजन करेंगे, कन्याभोज भी होंगे। लोक कल्याण और राज्य की प्रजा की सुख शांति और समृद्धि के लिए प्रशासन की ओर से नगर पूजा की जाएगी। इसमें देवी मदिरा अर्पित करने के बाद 40 से अधिक मंदिरों में पूजन के साथ 27 किमी तक मदिरा की धार चढ़ाई जाएगी।

नगर पूजा सुबह 7 बजे से शुरू
नगर पूजा की शुरुआत सुबह करीब 7 बजे गुदरी चौराहा स्थित चौबीस खंभा देवी मंदिर में देवी को मंदिरा की धार चढ़ाकर इसके बाद ढोल- ढमाकों के साथ शुरू होने वाली नगर पूजा रात्रि में करीब 8 बजे अंकपात स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर समाप्त होगी। नगर पूजन में करीब 12 घंटे में 27 किमी मार्ग पर करीब 40 माता, भैरव व हनुमान मंदिर मंदिरों में पूजा होगी। महाष्टमी पर प्रशासन की ओर से होने वाली नगर पूजा देखने लायक होती है। लोगों को वर्षभर इसका इंतजार रहता है। पूजन में 2 तेल डिब्बे, 5 किलो सिंदूर, 25 बॉटल मदिरा सहित 39 प्रकार की अन्य पूजन सामग्री का उपयोग होता है। एक दर्जन कोटवार सहित 50 से अधिक कर्मचारी 27 किलोमीटर पैदल चलकर पूजा संपन्न करेंगे।

शराब की धार टपकाते चलेंगे
महाष्टमी पर नगर पूजा में होने वाला खर्च शासन से तो नाममात्र ही मिलता है। इसमें खर्च होने वाली हजारों रुपए की राशि आज भी तहसील कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी आपस में चंदा कर जुटाते हैं। पूजन से लेकर भोग तक कई प्रकार की सामग्री इसमें लगेगी। नगर पूजा में ढोल व लाल ध्वज के साथ आगे एक व्यक्ति मिट्टी की हांडी में भरी शराब की धार टपकाते हुए पैदल चलेगा। मार्ग में माता व भैरव मंदिरों में कई जगह शराब चढ़ाई जाएगी। नगर पूजन का समापन मंगलनाथ रोड स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर रात करीब 8 बजे पूजा कर हुआ। यहां बड़ी संख्या में लोग पूजा व दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं।

हजारों साल पुरानी परंपरा
शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा हजारों साल पुरानी है। मान्यता है कि उज्जयिनी के सम्राट विक्रमादित्य लोक कल्याण और राज्य की प्रजा की सुख शांति और समृद्धि के लिए नगर पूजा करते थे। रियासत काल में सिंधिया राजघराने की ओर से यह परंपरागत पूजा की जाती थी। आजादी के बाद जिले के मुखिया होने के नाते कलेक्टर नगर पूजा की परंपरा निभाते हुए और नगर पूजा करने लगे। महाष्टमी पर दोपहर 12 बजे शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में भी परंपरा के अनुसार सरकारी पूजा होगी।

Published on:
16 Oct 2018 07:36 pm