पाश्चात्य प्रभाव से बचने के लिए संस्कार जरूरी गायत्री संस्कार शाला में विविध धार्मिक संस्कारों का आयोजन
माकड़ौन। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित गायत्री संस्कार शाला में भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में तेजी से बदलते परिवेश के बीच सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
गायत्री परिवार के जगदीश चंद्र कारपेंटर ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के दौर में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव युवाओं पर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे भारतीय परंपराएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना है, तो संस्कारों की परंपरा को पुनः जीवित करना होगा। हर परिवार को चाहिए कि वह अपने घर में सनातन मूल्यों को अपनाए और अगली पीढ़ी को संस्कारित बनाए।
कार्यक्रम के अंतर्गत चैत्र नवरात्रि के अवसर पर विशेष गायत्री अनुष्ठान संपन्न किया गया। इसमें दैनिक ध्यान, साधना, जप एवं यज्ञ के साथ विभिन्न धार्मिक संस्कार आयोजित किए गए। इनमें पुंसवन, नामकरण, अन्नप्राशन, विद्यारंभ, गुरु दीक्षा, मुंडन, जन्मदिवस एवं विवाह दिवस जैसे संस्कार वैदिक विधि से सम्पन्न कराए गए। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
आयोजकों ने बताया कि केवल नवरात्रि ही नहीं, बल्कि वर्षभर प्रतिदिन ध्यान, साधना, आरती एवं यज्ञ के साथ संस्कार निःशुल्क रूप से संपन्न कराए जाते हैं। इसका उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों का प्रसार करना और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। कार्यक्रम की जानकारी मोहनलाल सोनी द्वारा दी गई।
डीजे पर गूंजते भजनों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर समाजजन उत्साहपूर्वक नृत्य करते हुए शोभायात्रा में शामिल रहे। पूरे नगर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।शोभायात्रा के समापन पर मंदिर में ढोल, डमरू, तांबे एवं झांझ-मंजीरों के साथ महाआरती की गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।इस अवसर पर नवयुवक मंडल के सदस्य, माली समाज के वरिष्ठजन एवं अन्य रामभक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंतर्गत चैत्र नवरात्रि पर्व पर विशेष गायत्री अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसमें दैनिक ध्यान, साधना, जप एवं यज्ञ के साथ विभिन्न संस्कार आयोजित किए गए। इनमें पुंसवन, नामकरण, अन्नप्राशन, विद्यारंभ, गुरु दीक्षा, मुंडन, जन्मदिवस एवं विवाह दिवस संस्कार शामिल रहे।