उज्जैन

Ujjain News: हाईकोर्ट ने कहा- गुरु और शिष्या के भरोसे का दुरुपयोग किया, महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज मामले में बड़ा फैसला

Mahamandleshwar Gyandas Maharaj Case: उज्जैन के महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज के मामले को लेकर की इंदौर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी है।
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Aug 26, 2026
Mahamandleshwar Gyandas Maharaj Case
Mahamandleshwar Gyandas Maharaj Case: इंदौर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका की खारिज (फोटो सोर्स- Patrika)

Ujjain Mahamandleshwar Gyandas Maharaj Case: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन के महाकाल थाने में दर्ज मामले में फरार कथित हिंदू संत महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया संबंध के साक्ष्य है और आरोपी ने गुरु शिष्या के फिड्यूशियरी रिश्ते का दुरुपयोग किया है, इसलिए अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित नहीं है। एफआइआर 31 जुलाई 2026 को दर्ज हुई थी।

शादी का झांसा देकर किया गलत काम- पीड़िता ने कहा

पीड़िता का आरोप है कि आरोपी खुद को हिंदू संत और आध्यात्मिक गुरु बताता है। आध्यात्मिक जुड़ाव के चलते पीड़िता ने उससे संपर्क किया था। आरोपी ने उसे गोशाला ढूंढने और आश्रम में भंडारे की सेवा का काम सौपा। धार्मिक यात्रा के दौरान देर होने पर आश्रम में रुकने को कहा और संबंध बनाए। विरोध करने पर कहा कि यह गुरु दक्षिणा है। पीड़िता के अनुसार, बाद में शादी का वादा कर बार-बार संबंध बनाए और फिर शादी से इनकार कर दिया। धमकी भी दी गई।

ज्ञानदास महाराज ने पीड़िता पर लगाया आरोप

1 अगस्त 2026 को पीड़िता ने जेएमएफसी उज्जैन के समक्ष बयान दर्ज कराते हुए आरोपी पर खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ संबंध बनाने का आरोप लगाया ।वहीं, आरोपी की ओर से अधिवक्ता विवेक सिंह ने कोर्ट में तर्क दिया कि पीड़िता 36 वर्षीय बालिग है और वह कथित तौर पर आरोपी को ब्लैकमेल कर पैसे वसूलने का प्रयास कर रही है। आरोपी की ओर से यह भी बताया गया कि उसने 7 जुलाई 2026 को महाकाल थाने में शिकायत की थी और 27 जुलाई को जेएमएफसी उज्जैन में निजी शिकायत भी दायर की थी।

आरोपी का दावा है कि पीड़िता ने उसे अपने कमरे पर डिनर के लिए बुलाया, जहां उसे नशीला पदार्थ दिया गया और बाद में उसकी निजी तस्वीरें लेकर कथित तौर पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। बचाव पक्ष ने वॉट्सऐप चैट और यूपीआई भुगतान से जुड़े स्क्रीनशॉट भी कोर्ट के सामने पेश किए।

पीड़ित पक्ष ने जमानत याचिका का किया विरोध

दूसरी ओर, शासन पक्ष और पीड़िता के अधिवक्ता योगेंद्र भटवारिया ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। पीड़िता की ओर से आरोप लगाया गया कि आरोपी पहले से विवाहित है और उसने शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। बाद में उसे रिश्ते को लेकर अन्य प्रस्ताव दिए गए और फ्लैट खरीदने के लिए आर्थिक मदद की बात भी कही गई।

कोर्ट ने जांच के दौरान जब्त वॉट्सऐप चैट, दो तस्वीरों और अन्य सामग्री का अवलोकन किया। उपलब्ध सामग्री के आधार पर कोर्ट ने प्रथम दृष्टया दोनों के बीच संबंध होने के संकेत पाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि आध्यात्मिक गुरु की भूमिका में रहते हुए शिष्या के विश्वास और रिश्ते का कथित दुरुपयोग गंभीर प्रकृति का मामला है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। पीड़िता की पहचान और आरोपी का नाम न्यायालय के आदेश में गोपनीय रखा गया है।

Updated on:
26 Aug 2026 02:51 pm
Published on:
26 Aug 2026 02:51 pm