
पानबिहार. एक पुलिस चौकी जिसमें एक एसआई सहित कुल सात पुलिसकर्मी तैनात हैं और इन पर छोटे-बड़े मिलाकर कुल 30 गांव की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है, ऐसे में अब बढ़ती आबादी और बढ़ते अपराधों को देखते हुए इसे थाना बनाने की मांग उठने लगी है। इनके ही पास अपराधियों को पकडऩे के अलावा कई मामलों की विवेचना की भी जिम्मेदार रहती है। ऐसे में कानून व्यवस्था की पकड़ ढीली हो जाती है, इसलिए अब इस पुलिस चौकी को थाने में परिवर्तन करने की मांग ग्रामीणों ने की है। पुलिस चौकी पर महिला पुलिसकर्मी भी नहीं 30 गांव में ऐसा नहीं है कि महिला रिपोर्ट दर्ज कराने नहीं आती हो, लेकिन यहां पर महिलाकर्मी नहीं होने से पीडि़त महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिससे यहां पर महिला पुलिसकर्मी को पदस्थ करने की मांग ग्रामीणों ने करते हुए बताया कि पुलिस चौकी के लॉकअप में इतनी जगह नहीं है कि यदि कोई बड़ी गैंग पकड़ में आए तो उसे यह निरुद्ध किया जा सके। इधर चुनावी समय होने के कारण क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इनकी धरपकड़ के लिए बल की आवश्यकता है बल कम होने के कारण रात्रि गश्त भी नहीं हो पाती है जिसके कारण क्षेत्र में अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं और ऐसा भी नहीं कि इस पुलिस चौकी पर अपराध दर्ज नहीं होते। एक वर्ष में करीब सौ से उपर अपराध पंजीबद्ध किए जाते हैं और ऐसा भी नहीं कि क्षेत्र में कोई घटना नहीं हुई हो, कई बड़ी घटनाएं भी घर चुकी है फिर भी अधिकारी चौकी पर बल बढ़ाने की जगह चौकी प्रभारी को लाइन अटैच करके संतुष्टि कर लेते हैं।
गांव के गणेश गडकरी ने बताया कि पुलिस चौकी पर बल नहीं होने के कारण नगर व आसपास के क्षेत्रों में आपराधिक गतिविधियां बढ़ती जा रही है जल्द ही इस पुलिस चौकी को पुलिस थाने में परिवर्तन कर पुलिस बल बढ़ाना चाहिए, जिससे क्षेत्र में रात्रि गश्त हो सके और अपराधों पर अंकुश लग सके।
ग्रामीणों की जागरुकता के लिए किया दीवार लेखन
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पानबिहार. बिछड़ोद में बीएसडब्ल्यू छात्र नरेंद्र राठौर, सिद्धनाथ मंडलोई, भोजराज पंवार, शिवजीत सिंह, भोलाराम मालवीय, मोनिका शर्मा ने स्थानीय हाईस्कूल में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, मतदाता जागरुकता, भारत साक्षर अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी देकर नवमतदाताओं को शत प्रतिशत मतदान के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही गांव भ्रमण कर मतदान जागरुकता, साक्षरता, से सम्बंधित स्लोगन दीवारों पर लिखकर आम जन को न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों की भी मौखिक रूप से जानकारी दी। इस अवसर पर परामर्शदाता पवन राठौर एवं रत्नेश उपाध्याय ने भी अपनी सहभागिता की।