
प्रशासन से पर्व त्योहार पर पंडे-पुजारियों को विशेष प्रवेश की व्यवस्था देने की मांग
उज्जैन। महाकाल मंदिर में नागपंचमी पर्व व श्रावण सवारी होने पर भी बाबा का भांग-सूखे मेवे से शृंगार नहीं हो सका। प्रवेश व्यवस्था की बिगड़ी स्थिति के चलते पुजारी समय से यह कार्य नहीं कर सके। इससे मंदिर के सभी पंडे-पुजारियों में नाराजगी है। इन्होंने प्रशासन से मांग रखी कि भविष्य में पर्व-त्योहार पर मंदिर में पंडे-पुजारियों के आने-जाने, पूजा-पाठ, शृंगार आदि को लेकर विशेष व्यवस्था की जाए। अत्यधिक भीड़ होने के बावजूद किसी भी तरह का व्यवधान न हो और परंपरा भी न टूटे।
संध्या आरती से पहले होता है शृंगार
बता दें, बाबा की नित्य संध्या आरती से पहले भांग सूखे मेवे आदि से शृंगार होता है। यह शृंगार यजमान द्वारा रसीद कटाकर कराया जाता है। सोमवार को भी शृंगार की तैयारी पूरी थी, लेकिन भीड़ व अव्यवस्थाओं के चलते पुजारी भारत गुरु समय पर गर्भगृह में सामग्री ही लेकर नहीं पहुंच सके। इसके चलते पहली बार ऐसा हुआ, जब संध्या आरती से पहले किए जाने वाला भांग का शृंगार पुजारी नहीं कर पाए। वे जब तक पहुंचते संध्या आरती का समय ही हो चुका था। ऐसे में ताबड़तोड़ भांग की जगह भगवान का चंदन शृंगार ही किया जा सका।
परंपरा से खिलवाड़
सावन में महाकाल का भाग से शृंगार नहीं होने पर श्रद्धालुओं में भी नाराजगी है। लोगों का ेकहना है कि यह मंदिर की परंपरा से खिलवाड़ है। प्रशासन को सारी व्यवस्थाओं को एक तरफ रखकर इस पर ध्यान देना था।
महाकाल में शीघ्र दर्शन व्यवस्था से ३१ लाख से अधिक की आय
सावन सोमवार, नागपंचमी और तीसरी सवारी का संयोग होने से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। ऐसे में एक ही दिन में 250 रुपए शीघ्र दर्शन की रसीद से 31 लाख 12 हजार 500 रुपए एवं लड्डू प्रसादी से 6 लाख 90 हजार रुपए की आय हुई