
Ujjain Sankat Mochan Mandir: उज्जैन में बाबा महाकाल की अंतिम राजसी सवारी से दो दिन पहले छत्री चौक से कंठाल तक मार्ग को पूरी तरह तैयार करना नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। मार्ग का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद शुक्रवार को आखिरी बड़ी बाधा श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के विस्थापन की कार्रवाई शुरू हुई। सुबह 9 से 10 बजे के बीच निगम की टीम मौके पर पहुंची और आसपास की जगह का मुआयना करने के बाद चरणबद्ध तरीके से काम शुरू किया। पहले मंदिर की बाहरी दीवारें हटाई गई, फिर विशेष कटर से शिखर काटकर निकाला गया। दोपहर में बारिश और सुरक्षा के लिए बड़ा शेड लगाया गया। शाम तक खड़े हनुमानजी की प्रतिमा (Khade Hanumanji Relocation) को फोम और कपड़ों से सुरक्षित करने के बाद उठाने की कोशिश की गई, लेकिन करीब तीन फीट गहराई में शिला पर जमी मूर्ति को सीधा निकालना चुनौती बन गया।
नगर निगम की टीम शुक्रवार सुबह 9 से 10 बजे के बीच संकटमोचन हनुमान मंदिर पहुंची। विस्थापन कार्य की शुरुआत बाबा की आरती और पूजन से हुई। इसके बाद आसपास की जगह का मुआयना कर प्रतिमा और मंदिर की संरचना को नुकसान से बचाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम शुरू किया गया। सबसे पहले आसपास को दीवारे हटाई गई और मलबा बाहर हिस्सा खाली करने के बाद शिखर और प्रतिमा तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू की गई। निगम की टीम ने सावधानीपूर्वक कार्रवाई पर जोर दिया।
निगम की टीम ने सबसे पहले मंदिर के आसपास की दीवारें हटाई, ताकि आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। इसके बाद मलबा हटाया गया। दोपहर 1 बजे के बाद मंदिर के शिखर को विशेष कटर की मदद से काटकर निकालने का काम शुरू किया गया। शिखर को एक साथ तोड़ने के बजाय धीरे-धीरे काटकर हटाया गया, ताकि प्रतिमा को किसी प्रकार की क्षति न हो। कार्रवाई के दौरान हथौड़े का उपयोग नहीं किया गया। आवश्यकता पड़ने पर ही सीमित रूप से इसका इस्तेमाल किया गया। शाम तक शिखर का बड़ा हिस्सा निकल गया। प्रतिमा के आसपास खुदाई शुरू हुई।
दोपहर में सुरक्षा की दृष्टि से और बारिश से बचाव के लिए मंदिर परिसर में बड़ा शेड लगाया गया। इसके अंदर धीरे-धीरे दीवारें हटाकर मलबा बाहर निकाला गया। दिनभर मजदूरों और निगम कर्मचारियों की टीम मौके पर काम करती रही।
शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच मंदिर का शिखर पूरी तरह हटाया गया। इसके बाद प्रतिमा के आसपास फोम और कपड़े बांधे गए, ताकि मूर्ति उठाते समय किसी प्रकार की क्षति न हो। प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए कपड़ों और फोम से ढंका गया। निगम की टीम ने इसे उठाने के लिए आवश्यक व्यवस्था की। इसके बाद मूर्ति को सीधा उठाने की कोशिश शुरू हुई। प्रतिमा की ऊंचाई और वजन को देखते हुए क्रेन से उठाने के दौरान संतुलन बनाए रखना जरूरी था। प्रतिमा को उठाने के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सामने आई। प्रतिमा करीब तीन फीट गहराई तक जमीन में जमी हुई है। एक शिला पर पूरी तरह जमी है। इसे आड़ा किए बिना सीधा उठाना जरूरी था, लेकिन प्रयास के दौरान प्रतिमा नहीं उठ सकी।निगम की टीम ने प्रतिमा के आसपास की जगह को और खोदकर उसकी नींव तक पहुंचने की कोशिश शुरू की। देर शाम तक प्रतिमा को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया जारी रही।
कार्रवाई के दौरान मौके पर लोगों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं होती रहीं। कुछ लोगों का कहना था कि बाबा की प्रतिमा यहां से नहीं हटेगी। उनका तर्क था कि प्रतिमा जमीन के अंदर करीब तीन फीट तक धंसी है और एक शिला पर जमी है, इसलिए इसे सीधा उठाना आसान नहीं होगा। कुछ लोग यह भी कह रहे थे कि बाबा की इच्छा के बिना प्रतिमा नहीं हटेगी।
मंदिर से जुड़ी मान्यता भी लोगों के बीच चर्चा में रही। कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा बच्चों के लिए डॉक्टर का काम भी करते थे। जब कोई बच्चा बीमार होता था तो परिवार उसे यहां लेकर आता था। झाड़-फूंक, नजर उतारने और बाबा की मान्यता के बाद बच्चों के ठीक होने की बातें लोग बताते रहे हैं। एक महिला अपने बच्चों को लेकर दूर से आई थी। उसने भावुक होकर बताया कि उसके बच्चे लंबे समय से नहीं हो रहे थे। बाबा की मान रखने के बाद उसे संतान प्राप्ति हुई। कार्रवाई के दौरान कई भक्तों की आंखों से आंसू भी छलक पड़े।