उज्जैन विकास प्राधिकरण के नोटिस से लोगों के घर से बेघर होने का खतरा, कलेक्टर से बोले- दुर्भावनावश कर रहे प्रताडि़त
उज्जैन। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने लीज शर्तों के उल्लंघन को लेकर हरिफाटक महाकाल रोड के करीब ६० भवन स्वामियों को अंतिम नोटिस जारी किया है। इसमें भवन स्वामियों के समय लीज नवीनीकरण नहीं करने, भूखंड के टुकड़े करने और बगैर अनुमति बेचने संबंधी को लेकर जवाब मांगा है। भवन स्वामियों द्वारा संतुष्टीपूर्ण जवाब नहीं मिलने पर प्राधिकरण द्वारा भवन को पुन: कब्जे में लेने जैसे कार्रवाई की जा सकती है।
उज्जैन विकास प्राधिकरण ने पिछले दिनों मिली शिकायत के बाद हरिफाटक महाकाल रोड (हरिफाटक ब्रिज से महाकाल मंदिर की ओर रोड )के दोनों ओर के मकानों की जांच करवाई थी। इसमें सामने आया था कि भवन स्वामियों ने ३० वर्ष के बाद करवाई जाने वाली लीज का नवीनीकरण नहीं किया था। जबकि लीज नवीनीकरण की अवधि वर्ष २०१४ में ही खत्म हो गई। इसके अलावा भूखंडों के टुकड़े कर बांट दिए और बेच दिए गए। इसके लिए किसी तरह की अनुमति नहीं मिली। इस जांच के उपरांप यूडीए ने भवन स्वामियों को नोटिस चस्पा किए थे। बाद दूसरा नोटिस देकर इनसे संपत्तियों के जवाब मांगे गए थे। इनमें से अधिकांश ने जवाब नहीं दिए। इसके बाद अब तीसरा नोटिस देकर १५ दिन में जवाब मांगा गया है। ऐसे करीब ६० भवन स्वामियों को नोटिस दिए गए है। यूडीए अधिकारियों की माने तो भवन स्वामियों द्वारा नियमों का पालन नहीं किया गया है। चूंकि कई लोगों ने बिना अनुमति भूखंड के टूकउ़े कर दिए है। ऐसे में लीज अनुमति रदृद की जाएगी। प्रक्रिया उपरांत भवनों को सील करके कब्जे में लेने की कार्रवाई की जाएगी।
१९८० में आवंटित किए थे भूखंड
प्राधिकरण ने वर्ष १९८० के पूर्व महाकाल मार्ग पर हरिफाटक महाकाल मार्ग योजना का विकास किया था। हरिफाटक ब्रीज से महाकाल मंदिर की आरे जाने वाले मार्ग के दोनों ओर 216 वर्ग मीटर एवं उससे अधिक के भूखण्डों को आवंटित किय गया था।
जांच में निकली ऐसी गड़बडिय़ां
- ३० वर्ष में लीज डीड का नवीनीकरण कराया जाना था। भवन स्वामियों ने इसे नहीं करवाया।
- भवन स्वामियों ने भूखंडों का विभाजन कर दिया गया। इन भूखंडों को बेच दिया गया। जो कि लीज शर्त का उल्लंघन है।
- कुछभवन स्वामियां ने निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक की भूमि पर कब्जा कर रोड एवं सर्विस रोड की भूमि पर भी अतिक्रमण कर लिया।
- आवसीय उपयोग के लिए दिए गए भूखंड का व्यावसायिक उपयेाग किया गया। इसकी अनुमति नहीं ली गई।
४५ साल पुरानी कॉलोनी में अब क्यों दिखी गड़बड़ी
प्राधिकरण की ओर से को जारी किए गए नोटिस से भवन स्वामियों में आक्रोश जताया है। भवन स्वामियों का कहना है कि ४५ साल पुरानी कॉलोनी में गड़बड़ी यूडीए को अचानक क्यों दिखी। शहर में अन्य मुख्य मार्गोँ पर मकानों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है तो फिर यहां कार्रवाइ क्यों की जा रही है। क्षेत्रीय रहवासी व पार्षद फिरोज पठान की ओर से इस संबंध में यूडीए की इस कार्रवाई का मानवाधिकार, कलेक्टर, सीएम से भी शिकायत दर्ज की। रहवासियों ने बताया कि इतनी पुरानी कॉलोनी में परिवार के विभाजन पर भवन के टूकड़े हुए है। ऐसा प्राधिकरण की अन्य कॉलोनियों में भी हुए है। रहवासी लंबे समय से प्राधिकरण में लीज राशि जमा करने व फ्रीहोल्ड करने के लिए जाते रहे हैं, लेकिन इन्हें अनुमति नहीं दी गई। वहीं अब एक विशेष स्थान और एक वर्ग विशेष के लोगो के विरुद्ध जानबूझकर भ्रम एवं डर फैलाया जा रहा है। रहवासी यूडीए के साथ सहयोग करने को तैयार है और नियमानुसार लीज राशि व अन्य राशि भरने का तैयार है। भवन स्वामियों पर अनाधिकृत तरीके से कार्रवाई नहीं की जाए।
इनका कहना
हरिफाटक से महाकाल मार्ग पर यूडीए की आवासीय योजना में भवन स्वामियेां ने लीज डीड शर्तों का उल्लंघन पाया गया है। इन्हें अंतिम नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। इसके उपरांत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- संदीप सोनी, सीइओ यूडीए