
वाराणसी. लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी को ऐसा दो ट्रंप कार्ड मिल गया है जिसका जबाव देना पूर्व सीएम अखिलेश यादव व मायावती के लिए आसान नहीं होगा। विपक्ष जिन मुद्दों को लेकर राजनीति कर रहा है बीजेपी उन्हीं मुद्दों को अपने पक्ष में करने में जुट गयी है। कुल मिला कर कहा जा सकता है यह दो मुद्दा आने वाले समय में सपा व बसपा गठबंधन के लिए गले की हड्डी बन सकता है।
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बीजेपी के विरोधी दलों ने रोजगार , किसानों का मुद्दा, नीरव मोदी व विजय माल्या के देश छोडऩे के मुद्दे को लेकर बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। बीजेपी भी बैकफुट पर आ चुकी है और खुद पीएम नरेन्द्र मोदी व सीएम योगी को इन मुद्दों पर सफाई देनी पड़ती है लेकिन अब बीजेपी के पास दो बड़े ट्रप कार्ड आ चुके हैं, जिसके बाद से यही मुद्दे अब सपा व बसपा गठबंधन के लिए गले की हड्डी बनने वाले हैं। बीजेपी का दांव सही रहता है तो लोकसभा चुनाव २०१९ में सपा व बसपा को इन आरोपों का जवाब देना कठिन हो जायेगा।
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जानिए बीजेपी का दो ट्रंप कार्ड
1-यूपीएससी परीक्षा को लेकर सीबीआई ने दर्ज किये मुकदमे
अखिलेश यादव के कार्यकाल में यूपीएससी की परीक्षा में भ्रष्टाचार होने के आरोप लगे हैं। जाति खास के लोगों को पास करना व परीफल में गड़बड़ी करके कुछ लोगों को उत्र्तीण करने का भी आरोप लगा है। यूपी सरकार ने इस मामले की सीबीआइ जांच कराने की संस्तुति की है और सीबीआइ ने इस प्रकरण को लेकर मुकदमे दर्ज करना शुरू कर दिया है। सीबीआइ जांच की आंच जैसे ही सपा के नेताओं तक पहुंचेगी। वैसे ही यह प्रकरण बीजेपी नेता के लिए ट्रंप कार्ड बन जायेगा और जाति व रोजगार को लेकर सपा पर बड़ा हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।
2-चीनी मिल बिक्री की सीबीआइ जांच शुरू
सीबीआइ ने चीनी मिल बिक्री की सीबीआइ जांच शुरू कर दी है। इस मामले को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती की मुसीबत बढ़ सकती है यदि इस प्रकरण को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती पर एफआईआर दर्ज होती है तो बीजेपी किसानों के साथ अन्याय व भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा मुद्दा बना सकती है इसे बीजेपी अपना दूसरा टं्रप कार्ड मान रही है।
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आसान नहीं होगा सपा व बसपा का जवाब देना
बीजेपी के इन दो ट्रंप कार्ड का जवाब देना सपा व बसपा के लिए आसान नहीं होगा। यूपी में बीजेपी की सरकार बने साल भर से अधिक का समय बीत गया है लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले ही इन मुद्दों को लेकर सीबीआइ की सक्रियता बढ़ गयी है। सीबीआइ किसी मुद्दे को लेकर किसी नेता पर एफआइआर दर्ज करती है तो आम आदमी तुरंत ही विश्वास कर लेता है भले ही अदालत में जाकर उस एफआइआर पर सजा न हो।
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