पार्टी के लिए चुनौती होगी केशव प्रसाद की छोड़ी सीट बचाना, जानिए क्या है कहानी
वाराणसी. बीजेपी ने यूपी चुनाव जीतने के बाद सूबे की कमान सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपी है। बीजेपी में इस बात की चर्चा रहती है कि पीएम नरेन्द्र मोदी के उत्तराधिकारी के रुप में सीएम योगी को प्रस्तुत किया जा सकता है। इस बात का खुलासा होने में अभी काफी समय है, लेकिन बीजेपी के लिए सीएम योगी का उत्तराधिकारी नहीं मिलना किसी झटके से कम नहीं है।
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बीजेपी के लिए यूपी के दो संसदीय सीट पर होने वाले उपचुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। इन चुनावों को लेकर बीजेपी में हार का डर भी है इसलिए अभी तक उपचुनाव की तिथि घोषित नहीं हुई है। सीएम योगी आदित्यनाथ के बल पर बीजेपी इन दोनों सीटों पर कमल खिलाना चाहती है। सीएम योगी खुद गोरखपुर सीट से सांसद थे लेकिन सीएम बनने के बाद अपनी पारंपरिक सीट से सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद बीजेपी को सीएम योगी का उत्तराधिकारी भी नहीं मिल रहा है। इसके अतिरिक्त फूलपुर संसदीय सीट पर बीजेपी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। बीजेपी ने मोदी लहर के चलते इस सीट पर पहली बार विजय हासिल की थी अब फिर से इस सीट पर उपचुनाव होना है। यहां पर सपा व बसपा का दबदबा रहता है ऐसे में केशव प्रसाद मौर्या की जगह बीजेपी किसी प्रत्याशी बनाती है यह पार्टी तक नहीं कर पा रही है।
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गोरखपुर में हुआ गलत प्रत्याशी का चयन तो बीजेपी को लग जायेगा झटका
गोरखपुर की संसदीय सीट राजनीति के साथ लोगों की श्रद्धा का केन्द्र भी बन चुकी है। गोरक्षपीठ के महंत गुरु दिग्विज? नाथ ?? ने सबसे पहले गोरखपुर संसदीय सीट से 1967 में चुनाव जीता था उसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ ने इस सीट पर 1989 पर चुनाव जीता था इसके बाद से यह सीट गोरक्षपीठ के कब्जे में है। गोरखपुर की जनता का गोरक्षपीठ से ऐसी आस्था जुड़ी है कि मंदिर से जुड़ा व्यक्ति इस सीट से चुनाव लड़ता है तो उसका हारना संभव नहीं है। बीजेपी भी यह बात जानती है इसलिए पार्टी चाहती है कि सीएम योगी का उत्तराधिकारी मंदिर से जुड़ा कोई व्यक्ति हो। इसके चलते अभी तक बीजेपी ने सीएम योगी आदित्यनाथ के उत्तराधिकारी की खोज नहीं की है।
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