CBSE Board ने छात्रहित में जारी किया नया सर्कुलर, स्कूल असेस्मेंट और बोर्ड एग्जाम को मिलाकर 33 फीसदी अंक अर्जित करने वाले छात्रों को पास माना जाएगा, स्कूलों के वर्चस्व पर पड़ेगा असर।
वाराणसी.CBSE Board ने कक्षा 10 के छात्रों को बडी राहत दी है। बोर्ड की ओर से जारी नए सर्कुलर का असर छात्रों के रिजल्ट पर भी पड़ेगा। अलबत्ता स्कूलों का वर्चस्व प्रभावित होगा।
बता दें कि पिछले साल यानी 2018 में बोर्ड ने कक्षा 10 के विद्यार्थियों के लिए Board Exam अनिवार्य कर दिया था। नौ साल के बाद यह परंपरा फिर से शुरू की गई थी। इससे पहले तक यानी 2016 तक स्कूल ही 10वीं के छात्रों की वार्षिक परीक्षा भी लेता रहा। बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था लागू करते वक्त CBSE Board ने यह भी तय किया था कि स्कूल स्तर से दिए जाने वाले पिरियाडिक टेस्ट, नोट बुक और सबजेक्ट एनरिचमेंट के आधार पर अर्थात इंटर असेसमेंट में भी छात्र को अलग से 33 फीसदी अंक हासिल करना जरूरी होगा। यानी 80 नंबर के बोर्ड एग्जाम और स्कूल असेस्मेंट (इंटर्नल एग्जाम) में अलग-अलग 33 फीसदी अंक लाना जरूरी होगा। लेकिन बाद में इसमें छूट दे दी गई। बोर्ड ने कहा कि स्कूल असेस्मेंट और बोर्ड एग्जाम को मिलाकर 33 फीसदी अंक अर्जित करने वाले छात्रों को पास माना जाएगा। ऐसा इसलिए किया गया था ये छात्र पहली बार बोर्ड का एग्जाम दे रहे हैं लिहाजा उन्हें पहली बार छूट दे दी जाए। लेकिन तब ये कहा गया था कि 2019 की परीक्षा में यह सुविधा नहीं दी जाएगी।
बनारस और चंदौली के कोआर्डिनेटर व सनबीम डॉलिम्स रोहनिया के प्रधानाचार्य वीके मिश्र ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड ने इस बार भी छात्रों को रियायत दी है। कहा है कि स्कूल असेस्मेंट रिजल्ट (इंटर्नल एग्जाम) और बोर्ड एग्जाम को मिला कर 33 फीसदी अंक पाने वाले छात्र को उत्तीर्ण माना जाएग।
उन्होने बताया कि स्कूल स्तर पर तीन पिरियाडिक टेस्ट होते हैं जिसमें से दो बेहतर रिजल्ट वाले को लिया जाता है। यह 10 नंबर का होता है। इसके अलावा क्लास रूम में छात्रों की रुचि बनाए रखने के लिए सब्जेक्ट टीचर को नोटबुक नंबर भी देने होते हैं। यह पांच नंबर का होता है। इसके अलावा सब्जेक्ट एनरिचमेंट के भी 05 नंबर होते हैं। ऐसे में स्कूल स्तर पर हर छात्र को 20 नंबर के पूर्णांक में नंबर देने होते हैं। ऐसे में स्कूल स्तर पर इस 20 में 33 फीसदी और बोर्ड एग्जाम के 80 नंबर के एग्जाम में अलग-अलग 33 फीसदी नंबर हासिल करना अनिवार्य करने की योजना थी जिसे इस बार भी सीबीएसई बोर्ड ने रद कर दिया है।