
FSDA News Varanasi: त्यौहार के सीजन में मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य विभाग द्वारा चलाया गया अभियान सिर्फ एक प्रशासनिक दावा और रस्म ही साबित होकर रह गया है। अगस्त महीने में रक्षाबंधन के त्यौहार को देखते हुए वाराणसी में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 31 जगह से सैंपल लिए थे, लेकिन आलम यह है की दिवाली आ रही है और 13 की जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। जो रिपोर्ट विभाग को मिली है, उसमें से सबसे ज्यादा मिलावट पनीर में पाई गई है। इसके साथ ही सैंपलिंग किए गए 6 नमूने फेल हो गए हैं, लेकिन अब तक उनके ऊपर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
रक्षाबंधन पर विभाग ने 523 किलो मिठाई और खोआ नष्ट कराया था, लेकिन संबंधित कारोबारी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में छोटी-बड़ी करीब 2200 से अधिक मिठाई और डेयरी उत्पाद की दुकानें संचालित हैं। दिवाली पर 5 दिन में करीब 25 हजार कुंतल मिठाई की खपत सिर्फ वाराणसी जिले में ही होती है। इसके विपरीत निगरानी के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के पास ना तो कोई बुनियादी ढांचा है और ना ही पर्याप्त संख्या में लोग। आलम यह है कि अभियान केवल मुख्य सड़कों और गिनी चुनी दुकानों तक सिमट कर रहा जाता है, जबकि घनी आबादी और बस्तियों में धड़ल्ले से केमिकल युक्त मावा बेचा जा रहा है।
खाद्य विभाग सैंपलिंग तो करता है, लेकिन नतीजा आने तक पूरी मिठाई खप जाती है। नमूनों की जांच के लिए राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला लखनऊ ही एकमात्र सहारा है। तय मानकों को के अनुसार, रिपोर्ट 14 से 30 दिनों के भीतर आ जानी चाहिए, लेकिन बनारस में महीनों तक फाइलें धूल फाकती रहती हैं। जब तक नतीजे आते हैं, तब तक संबंधित बैच का सारा माल बिक चुका होता है। आलम यह है कि 6 महीने में 39 सैंपल फेल हुए हैं। खाद्य विभाग की जांच में पिछले 6 महीना में दूध से ज्यादा पनीर में मिलावट पाई गई है। हालांकि, जिला प्रशासन ने 21.52 लाख रुपए का जुर्माना भी वसूला है।
खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त कौशलेंद्र शर्मा ने बताया कि जो भी सैंपल जांच में फेल हुए हैं, उनके लिए एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है। कोर्ट की कार्यवाही में ही इन पर जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग ऐसे लोगों पर पहले भी कार्रवाई करता था और आगे भी यह जारी रहेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि रक्षाबंधन के दौरान विभाग ने बनारस के कई इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी और 523 किलो मिठाइयों को नाले में फेंकवा दिया था। विभाग ने दावा किया था कि प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिलते ही संबंधित के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी वसूला जाएगा। 60 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, जिनमें से फेल हुए 6 सैंपल पर भी जुर्माना नहीं लगाया जा सका है। ऐसे में अब दीपावली भी नजदीक है, खाद्य विभाग लगातार कारवाइयां कर रहा है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब तक रिपोर्ट आएगी तब तक कई क्विंटल खोआ और मावा बनारसी डकार चुके होंगे।