
वाराणसी. माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह के लिए २३ अक्टूबर की डेट महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अपर सत्र न्यायधीश प्रथम पीके शर्मा की अदालत ने सिकरौरा नरसंहर की वादिनी हीरावती को बयान दर्ज करने के लिए तलब किया है। बृजेश सिंह की रिहाई इसी मुकदमे के चलते रुकी हुई है। अब देखना है कि वादिनी इस मामले में क्या बयान देती है।
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सिकरौरा नरसंहार में अन्य लोगों के साथ बृजेश सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। बृजेश सिंह लंबे समय तक फरार थे इसलिए इस मुकदमे में बृजेश सिंह की भूमिका पर सुनवाई नहीं हो पायी थी। मुकदमे की सुनवाई पहले से चल रही थी, जिसमे कई आरोपी बरी भी हो चुके हैं। बृजेश सिंह के सरेंडर करने के बाद ही सिकरौरा नरसंहार में बृजेश सिंह की भूमिका को लेकर सुनवाई शुरू हुई है। इस मुकदमे में बृजेश सिंह को पहले ही झटका लग चुका है। बृजेश सिंह ने अदालत में दावा किया था कि घटना के समय वह नाबालिग थे और लंबी बहस के बाद कोर्ट ने बृजेश सिंह की याचिका को निरस्त करते हुए उन्हें बालिग माना था। इसके बाद ही अपर सत्र न्यायधीश पीके शर्मा की अदालत ने वादिनी को बयान देने के लिए बुलाया है साथ ही मुकदमे से जुड़े सबूतों को पेश करने का आदेश दिया है।
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३१ वर्ष पूर्व हुआ सिकरौरा नरसंहार
सिकरौरा नरसंहार ३१ वर्ष पूर्व हुआ था, जिसमे एक साथ सात लोगों की हत्या की गयी थी। इस नरसंहार में बृजेश सिंह को भी आरोपी बनाया गया है।जमीन विवाद के चलते एक साथ सात लोगों की हत्या हो जाने पर जमकर हंगामा मचा था। बृजेश सिंह के लिए यह मुकदमा गले की हड्डी साबित हो गया है। बृजेश सिंह लंबे समय से जेल में है और जेल से ही एमएलसी का चुनाव जीत चुके हैं। बृजेश सिंह अधिकांश मुकदमों से बरी हो गये हैं। सिकरौरा नरसंहार ही ऐसा मुकदमा है, जो बृजेश सिंह की रिहाई में बाधक बना हुआ है, जिसकी सुनवाई अब महत्वपूर्ण जगह पहुंच गयी है।
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महिला को कड़ी सुरक्षा में अदालत में लाया जायेगा
सिकरौरा नरसंहार की वादिनी हीरावती ने मंगलवार को विशेष न्यायधीश प्रथम पीके शर्मा की कोर्ट में आवेदन देकर साक्ष्य देने में जान-माल का खतरा बताया है। इस पर कोर्ट ने वादिनी को एमएलसी बृजेश सिंह की तरह सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एसपी चंदौली को २३ अक्टूबर को वादिनी के बयान के समय पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने को कहा है।
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