प्रदेश में कोरोना (Corona Virus) से दूसरी लहर की गति धीमी पड़ रही है। वाराणसी जिले में भी कोविड के मद्देनजर हालातों में पहले से सुधार हुआ है। अब तीसरी लहर की आशंका से निपटने के लिए बनारस मॉडल ने नया प्लान बनाया है, जो कि 31 मई से लागू होगा।
वाराणसी. प्रदेश में कोरोना (Corona Virus) से दूसरी लहर की गति धीमी पड़ रही है। वाराणसी जिले में भी कोविड के मद्देनजर हालातों में पहले से सुधार हुआ है। अब तीसरी लहर की आशंका से निपटने के लिए बनारस मॉडल ने नया प्लान बनाया है, जो कि 31 मई से लागू होगा। यह प्लान वाराणसी के साथ-साथ चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर में भी आजमाया जाएगा। इन जिलों में रोजाना कोरोना को लेकर होने वाली जांच की आधी यानी 50 फीसदी जांच नवजात से लेकर 18 साल तक की होगी। निजी या सरकारी अस्पताल में किसी भी समस्या को लेकर पहुंचने वाले बच्चों को सबसे पहले कोरोना जांच होगी। यानी कि कोरोना के अलावा अगर किसी को निमोनिया, पेट दर्द आदि की शिकायत है तो इसकी भी जांच होगी। सभी निजी और सरकारी बच्चों के अस्पताल को किट सौंपी गई है।
प्रशासन रहेगा अलर्ट
वाराणसी मंडल के कमिश्नर दीपक अग्रवाल का कहना है कि इस प्लान के तहत कोई भी केस की रिपोर्ट मिलते ही वाराणसी प्रशासन अलर्ट हो जाएगा। दूसरा प्रशासन को केस स्टडी और हिस्ट्री जानकर ये पता लगाना आसान होगा कि लक्षण क्या थे और बच्चे तक संक्रमण पहुंचा कैसे। इसके लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को निर्देशित किया गया है। बच्चों की जांच के लिए अलग से कोई अभियान नहीं चलेगा। मॉडल के ही अंतर्गत यह कार्य पूरा होगा। केस कम होने के बाद 31 मई से पहले की तरह पचास फीसदी जांच सामान्य होंगी। शेष 50 फीसदी में एक तिहाई जांच शून्य यानी नवजात से पांच साल, एक तिहाई छह से 12 साल और बाकी एक तिहाई 13 से 18 वर्ष के बच्चों, किशोर और नौजवानों की जांच होगी।