
यशोदा श्रीवास्तव/पत्रिका टीम
महाराजगंज/इलाहाबाद/वाराणसी. यह खबर आपको हैरान कर सकती है। लेकिन यूपी बोर्ड ने इस साल अपना रिजल्ट सुधारने के लिए कुछ ऐसे कदम उठाए हैं, जो परीक्षाफल पर ही सवाल खड़े कर दे रहे हैं। दरअसल बोर्ड ने अपना रिजल्ट प्रतिशत बढ़ाने के लिए एक दो नहीं बल्कि हजारों बच्चों को पास कर दिया है। पत्रिका को मूल्यांकन से जुड़े अध्यापकों ने कुछ ओएमआर सीट की फोटो भेजी है, जो अपने आप में हैरान करने वाला है। इन शिक्षकों का साफ कहना है अगर मूल्यांकन के हिसाब से रिजल्ट जारी होता तो परीक्षाफल का प्रतिशत 35 से 40 फीसदी ही होता। हालांकि बोर्ड सचिव ने आरोपों से सीधे इनकार कर दिया।
मॉडरेशन सिस्टम के तहत थोक में दे दिए नंबर
इस बार 11 लाख से अधिक बच्चों ने परीक्षा छोड़ दी थी। साथ ही जिस हिसाब की सख्ती थी, उससे अंदाजा लग गया था कि इस बार परीक्षाफल काफी गिरेगा। सूत्रों की मानें तो इससे भयभीत बोर्ड ने माडरेशन सिस्टम के तहत जो छात्र कम नंबर से फेल हो रहे थे, उन्हें पास कर दिया गया। इसके लिए इन छात्रों को २ से लेकर २० तक अतिरिक्त नंबर दिए गए। हालांकि इस संबंध में कोई भी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि सीबीएसई में यह सिस्टम लागू है, इसलिए यूपी बोर्ड में इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया है।
प्रैक्टीकल में भी किया गया खेल
बोर्ड ने इस बार प्रैक्टीकल परीक्षा में भी दिल खोलकर नंबर दिया। अधिकांश छात्रों को 30 में से 30 29, 28 नंबर तक दिए गए हैं। ऐसा बोर्ड की ओर से रिजल्ट प्रतिशत बढ़ाने के लिए किया गया है।
पत्रिका ने कई शिक्षकों को दिखाई ओएमआर शीट
पत्रिका को उपलब्ध कराई गई ओएमआर शीट की फोटो को जब मूल्यांकन में लगे कई शिक्षकों को दिखाया गया तो उन्होंने बताया कि यह सही ओएमआर शीट है। इसे देखकर साफ लगता है कि बच्चों को अतिरिक्त नंबर दिए गए हैं।
पत्रिका के पास हाईस्कूल विज्ञान की ओएमआर शीट की फोटो
पत्रिका के पास मौजूद 931 हाईस्कूल विज्ञान की ओएमआर शीट में आसानी से देखा जा सकता है कि अधिकांश छात्र फेल हैं, लेकिन जब रोल नंबर के आधार पर रिजल्ट देखा गया तो यह पास थे। इससे आभास होने लगा है कि छात्रों को पास करने के लिए उनका नम्बर बढ़ा दिया गया है।
बोर्ड ने आरोपों को नकारा
माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव नीना श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है कि नियमों की अनदेखी की गई है। बोर्ड जैसा पहले काम करता था, वैसा इस बार भी किया गया है। परीक्षकों के ओएमआर शीट के नंबर और अंकपत्र के नंबर में अंतर के आरोप को उन्होंने गलत बताया, साथ ही कहा कि कुछ प्रक्रिया गोपनीय होती है।
कहीं 2019 के लिए तो नहीं हुआ खेल
यूपी की राजनीति में बोर्ड परीक्षा का प्रतिशत हमेशा बड़ा मुद्दा रहता है। इस बार सरकार की सख्ती ने विपक्ष के निशाने पर उसे पहले ही ला दिया था। लोगों का मानना है कि सरकार के दबाव में ही छात्रों को पास करने का बड़ा कदम उठाया गया है, ताकि 2019 में विपक्ष इसे मुद्दा न बना सके।