
वाराणसी. डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा ने कल्याण सिंह सरकार से सबक लेते हुए यूपी बोर्ड की परीक्षा में बड़ा दांव खेला। डिप्टी सीएम का दांव सफल हुआ और विरोधियों को बीजेपी सरकार पर हमला बोलने का मौका नहीं मिल पाया। यदि डिप्टी सीएम की योजना फेल हो जाती तो बीजेपी सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी बढ़ सकती थी जिसका नुकसान संसदीय चुनाव 2019 में उठाना पड़ सकता था।
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कल्याण सिंह सरकार ने यूपी बोर्ड की परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए नकल अध्याधेश लाया था जिसके चलते नकल मारने के आरोप में छात्रों को जेल जाना पड़ा था और रिजल्ट प्रतिशत भी अधिकतम तीस प्रतिशत ही गया था इसके बाद लोगों की नाराजगी कल्याण सिंह सरकार से हो गयी थी और यूपी विधानसभा चुनाव हार कर बीजेपी को इसकी कीमत चुकानी पड़ी थी। सीएम योगी सरकार आने के बाद एक बार फिर बोर्ड परीक्षा को नकल विहीन कराने की कवायद शुरू की गयी है। इस बार जिम्मेदारी डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा को मिली है। यूपी बोर्ड की परीक्षा में फिर सख्ती की गयी थी और सभी परीक्षा केन्द्रों पर सीसीटीवी लगाया गया था जिसके चलते बोर्ड परीक्षा में पूर्व वर्षों की तरह नकल नहीं हो पायी थी और लगभग 11 लाख छात्रों ने बोर्ड परीक्षा छोड़ दी थी। इसके बाद से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर सबसे अधिक हमला किया था। अखिलेश यादव ने मीडिया में कहा था कि यूपी सरकार नौकरी देने में असमर्थ है इसलिए बच्चों की परीक्षा छोड़वायी गयी है। बीजेपी के विरोधी अन्य दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला था।
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जानिए कैसे सफल हुआ डिप्टी सीएम का दांव
बोर्ड परीक्षा में जिस तरह की सख्ती करने की बात कही गयी थी उसके अनुसार माना जा रहा था कि रिजल्ट का प्रतिशत बहुत कम होगा। यूपी बोर्ड का रिजल्ट जब घोषित हुआ तो पता चला कि हाई स्कूल व इंटर दोनों का ही प्रतिशत ७० प्रतिशत से अधिक है। छात्रों को अच्छे अंक भी मिले हैं और ऐसे कई छात्र भी है जो पूर्व वर्षों में फेल हो जाते थे लेकिन इस बार उन्होंने भी परीक्षा पास कर ली है। रिजल्ट का प्रतिशत बढऩे से उन अभिभावकों पर दबाव बढ़ गया है जिनके बच्चों ने नकल नहीं होने के डर से परीक्षा छोड़ी थी। समाज में संदेश गया कि जिन छात्रों ने पढ़ कर परीक्षा दी थी वह पास हो गये हैं। बोर्ड रिजल्ट का प्रतिशत अधिक होने से छात्रों के परीक्षा छोडऩे का मुद्दा अब कमजोर पड़ गया है। विरोधी भी बोर्ड के रिजल्ट को लेकर सरकार को घेरने में असफल रहे। इससे साफ हो जाता है कि अच्छे प्रतिशत के दांव ने आम लोगों के प्रति नकल रोकने को लेकर बनायी गयी व्यवस्था पर विश्वास बढऩे लगा है जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है।
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