
नई दिल्ली। किशोरावस्था में पहुंचने के बाद अक्सर लड़कियों के शरीर और बरताव में बदलाव आते हैं, लेकिन महज 18 साल की उम्र में इस लड़की के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उसकी पूरी सूरत और जिंदगी ही बदल गई। 18 साल की साईदा अहमद बगिली को ऐसी बीमारी थी जिसमें वो 18 साल के बजाए 80 साल की किसी बुजुर्ग की तरह दिखती थी। गृहयुद्ध के दौरान लगी आग के कारण खाने की कमी के कारण इस लड़की की यह हालत हो गई। युद्ध के कारण लोगों को अपना घर संसार छोड़ कर जाना पड़ गया। यमन में महामारी का सिलसिला बदस्तूर जारी था और रुकने का नाम नहीं ले रही और नतीजा साईदा जैसे मासूमों को भुगतना पड़ रहा है। लकड़ी की ढ़ाचा बनने के बावजूद भी साईदा और उसके घरवालों ने बिल्कुल हिम्मत नहीं हारी।
जानकारी के लिए बता दें कि, यहां के युद्धों ने आम जीवन को बहुत प्रभावित किया। साईदा अहमद अपने परिवार के साथ राजधानी सना के पास एक गांव में रहती थी। लेकिन जब वहां गृह युद्धों की शुरुआत हुई, तो यमन में खाने-पीने की किल्लत हो गई। लोग मजबूर होकर को अपना घर छोड़ कर दुसरे देशों में रह बसर करना पड़ा। ऐसे हालातों में यमन वासियों को जहां भी ठिकाना मिला, वहीं उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत कर दी। साईदा का परिवार इतना गरीब था कि ना उसको रोटी खिला पा रहा था और ना ही उसका इलाज करवा पा रहा था।
बिना खाने के साईदा की हालत बहुत नाजुक थी। ऐसे में एक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सैदा को व्हील चेयर पर अस्पताल में भर्ती कराया और उसका इलाज शुरू कराया। सैदा इतनी कमजोर हो चुकी थी कि उसकी जुबान लग गयी थी। लेकिन, डॉक्टरों की दिन-रात एक कर के उसे ठीक कर दिया है। अब वो आम लड़कियों जैसी ठीक और स्वस्थ होकर बेहतर जीवन जी रही है।